अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी वार्ता के सकारात्मक नतीजे आने पर होर्मुज स्ट्रेट जल्द खुल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे की बातचीत का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी वार्ता के सकारात्मक नतीजे आने पर होर्मुज स्ट्रेट जल्द खुल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे की बातचीत का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना होगा।

Trump on Iran Talks: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया है। सोमवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जल्द ही पूरी तरह खोला जा सकता है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा बातचीत केवल समुद्री मार्ग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी।

ट्रंप के अनुसार अमेरिका और संबंधित पक्षों के बीच वार्ता तेजी से आगे बढ़ रही है और अगले एक-दो दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शुरुआती चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने पर सहमति बन सकती है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है। यदि यह मार्ग पूरी तरह खुलता है, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को राहत मिल सकती है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि समुद्री मार्ग से जुड़े मुद्दों पर प्रगति होने के बाद वार्ता का अगला केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम होगा। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वाशिंगटन पहले की तरह ही परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में है। उनके अनुसार, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए यह मुद्दा सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह दावा भी किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था। हालांकि, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और स्वयं ईरान की ओर से बातचीत का एक और अवसर देने की अपील की गई। इसके बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय लिया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए ईरान को समझौते का एक अंतिम अवसर दिया है। उनके अनुसार, अब यह फैसला ईरान के हाथ में है कि वह बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ता है या नहीं।
ट्रंप के दावों के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ता की खबरों से इनकार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट कहा कि तेहरान इस समय वाशिंगटन के साथ किसी द्विपक्षीय बातचीत में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को लेकर ओमान के साथ जो तकनीकी व्यवस्था तैयार की जा रही है, उसका उद्देश्य केवल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। बगाई ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने संबंधी किसी राजनीतिक समझौते से कोई सीधा संबंध नहीं है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social और मीडिया से बातचीत के दौरान ईरानी नेतृत्व पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारी बंद कमरे में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ लंबी बातचीत करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से किसी भी प्रकार की वार्ता से इनकार कर देते हैं। ट्रंप के अनुसार, इस तरह का व्यवहार दोनों देशों के बीच भरोसा कायम करने में बाधा बनता है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत में पारदर्शिता रहे तो समाधान तक पहुंचना आसान हो सकता है।
ईरान मुद्दे पर बयान देने के अलावा ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य परिवारों के लिए एक नई पहल की भी घोषणा की। उन्होंने प्रेसिडेंशियल मिलिट्री स्पाउस कमीशन के गठन संबंधी एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने कहा कि इस आयोग का उद्देश्य सैन्य कर्मियों के परिवारों, विशेष रूप से उनके जीवनसाथियों को बेहतर सहायता, रोजगार के अवसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य समुदाय के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
ट्रंप के बयान और ईरान की प्रतिक्रिया के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी समझौते की दिशा में ठोस प्रगति होती है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। वहीं परमाणु कार्यक्रम को लेकर संभावित वार्ता भी आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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