US Sanctions
US Sanctions: वॉशिंगटन से आई एक बड़ी खबर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने चीन की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी, ‘हेंगली पेट्रोकेमिकल’, पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान से अरबों डॉलर मूल्य के कच्चे तेल का आयात किया है। यह कार्रवाई व्हाइट हाउस के उस व्यापक और आक्रामक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान के राजस्व के सबसे बड़े स्रोत—तेल निर्यात—को पूरी तरह से ठप करना है। अमेरिकी वित्त विभाग ने हेंगली रिफाइनरी को ईरान के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक के रूप में चिह्नित किया है, जो वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद तेहरान के साथ व्यापार जारी रखे हुए थी।
रिफाइनरी के साथ-साथ, अमेरिका ने लगभग 40 ऐसी शिपिंग कंपनियों और जहाजों को भी ब्लैकलिस्ट किया है, जो ईरान के ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) का हिस्सा हैं। ‘शैडो फ्लीट’ उन गुप्त जहाजों के बेड़े को कहा जाता है जो प्रतिबंधों की नजर से बचने के लिए संबंधित देश का झंडा नहीं लगाते और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर तेल का परिवहन करते हैं। अमेरिका का मानना है कि ये जहाज गुप्त रूप से ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने में मदद करते हैं। यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रतिबंध राष्ट्रपति ट्रंप की अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से होने वाली आगामी मुलाकात से ठीक पहले लगाए गए हैं।
जिस हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया है, वह चीन के डालियान बंदरगाह शहर में स्थित है। इसकी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता लगभग 400,000 बैरल प्रतिदिन है, जो इसे चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों की श्रेणी में खड़ा करती है। अमेरिकी वित्त विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, हेंगली साल 2023 से ही लगातार ईरानी तेल की खेप प्राप्त कर रही थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ट्रेजरी विभाग उन सभी जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों के नेटवर्क को ध्वस्त करना जारी रखेगा, जो ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। उनका लक्ष्य ईरानी सरकार पर वित्तीय शिकंजा कसना है ताकि वे अपनी गतिविधियों के लिए धन जुटा न सकें।
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस महीने की शुरुआत में ही चीन, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान जैसे देशों को पत्र लिखकर कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि इन देशों के वित्तीय संस्थान ईरान के साथ व्यापार करते हैं या ईरानी धन को अपने बैंकों में रखते हैं, तो अमेरिका उन पर ‘द्वितीयक प्रतिबंध’ (Secondary Sanctions) लगाने में संकोच नहीं करेगा। सेकेंडरी प्रतिबंधों का मतलब है कि उन बैंकों या संस्थानों को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा, जो किसी भी देश या कंपनी के लिए एक बड़ा व्यापारिक झटका हो सकता है।
विभिन्न आंकड़ों (जैसे Kpler 2025) से यह स्पष्ट होता है कि ईरान द्वारा निर्यात किए जाने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 80% से अधिक हिस्सा अकेले चीन खरीदता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां अमेरिकी प्रतिबंधों से आंशिक रूप से सुरक्षित रहती हैं क्योंकि उनका अमेरिकी डॉलर या वित्तीय तंत्र से सीधा जुड़ाव बहुत कम होता है। रणनीतिकारों का कहना है कि यदि अमेरिका को ईरानी तेल की बिक्री पर वास्तव में बड़ा असर डालना है, तो उसे उन चीनी बैंकों को निशाना बनाना होगा जो इन सौदों के लिए भुगतान और लेनदेन की सुविधा प्रदान करते हैं। यह आने वाले समय में अमेरिका और चीन के द्विपक्षीय संबंधों में और अधिक तनाव पैदा कर सकता है।
UK Board Result 2026 : उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने साल 2026 की 10वीं…
Bengal Election : पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र के महापर्व के दौरान निष्पक्षता से समझौता करने…
Nashik TCS Case : महाराष्ट्र के नासिक में बहुचर्चित टीसीएस (TCS) उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले…
Gold Today Silver Rate : भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में बीते…
Mau Accident : उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक खबर सामने आई…
NITI Aayog : भारत के नीति निर्धारण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संस्थान, नीति…
This website uses cookies.