Trump Saudi Arabia : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को लेकर एक अहम रणनीतिक चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब की अपील के बाद अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ संभावित हवाई कार्रवाई की तैयारी की थी, लेकिन ट्रंप ने फिलहाल इस अभियान को आगे बढ़ाने से रोक दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका को सऊदी अरब के साथ अपने सहयोग और ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से मांगी थी मदद
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से फोन पर हूती हमलों के खिलाफ अमेरिकी मदद मांगी थी। इसके बाद अमेरिकी रक्षा अधिकारियों को संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के निर्देश दिए गए। बताया गया कि अमेरिकी कमांडरों ने संभावित लक्ष्यों की सूची तैयार कर ली थी और विमानों के लिए हथियारों की तैयारी भी की जा रही थी। हालांकि, कार्रवाई शुरू होने से पहले ट्रंप ने फिलहाल इसे रोकने का फैसला किया।
हूती हमलों को लेकर अमेरिका के सामने रणनीतिक चुनौती
इस मामले में अमेरिका के सामने एक प्रमुख सवाल यह है कि सऊदी अरब को सुरक्षा सहयोग देने और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष को सीमित रखने के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए। हालिया घटनाक्रम में हूतियों ने सऊदी अरब की ओर हमले तेज किए हैं। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, हूती समूह सऊदी अरब पर हमलों का विस्तार कर रहा है और इसका एक उद्देश्य रियाद पर दबाव बढ़ाना हो सकता है।
अमेरिकी हमले से पहले के अनुभव भी अहम
हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का पिछला अनुभव भी मौजूदा फैसले को प्रभावित कर सकता है। 2025 में अमेरिका ने यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ लंबा हवाई अभियान चलाया था। इसके बावजूद क्षेत्र में हमलों का सिलसिला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। बाद में अमेरिका और हूतियों के बीच युद्धविराम हुआ और अमेरिकी जहाजों पर हमलों में कमी आई। ऐसे में दोबारा बड़े सैन्य अभियान से लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सऊदी सहयोग और ईरान संघर्ष बना अहम मुद्दा
अमेरिका के लिए सऊदी अरब का सहयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान के साथ जारी टकराव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। दूसरी ओर, सऊदी अरब पर हूती हमलों के बढ़ने से रियाद की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाएं भी अनिश्चित बनी हुई हैं। हालिया रिपोर्टों में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संपर्क की कोशिशों का उल्लेख किया गया है।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने से किया इनकार
इसी बीच ईरान ने रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। ईरानी संसद के स्पीकर और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने या पुराने वार्ता ढांचे में लौटने की संभावना नहीं है।
मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई गईं मांगें
गालिबाफ के अनुसार, ईरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक अपनी मांगें और शर्तें पहुंचा दी हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि तेहरान अपने अधिकारों की मान्यता और अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन को बातचीत तथा समुद्री मार्ग खोलने से जोड़ रहा है। ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने भी कहा है कि किसी नई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।
होर्मुज पर तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इसलिए इसके लंबे समय तक बंद रहने या यहां सैन्य तनाव बढ़ने का असर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका-ईरान तनाव, हूती गतिविधियां और सऊदी सुरक्षा चिंताएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसी वजह से पश्चिम एशिया का यह संकट सैन्य घटनाक्रम के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
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