Panama Canal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि पनामा नहर का नियंत्रण पनामा देश को सौंपना एक बेहद गलत और ‘बेवकूफी भरा’ फैसला था। थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने इस ऐतिहासिक निर्णय की कड़ी निंदा की। उन्होंने तर्क दिया कि नहर के हस्तांतरण के बाद पनामा ने वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए शुल्क में भारी वृद्धि कर दी, जिससे व्यापार पर असर पड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इसके बावजूद नहर ने अत्यधिक मुनाफा कमाया, जो यह साबित करता है कि अमेरिका ने एक रणनीतिक गलती की थी।

पनामा नहर पर चीन की बढ़ती नजर और अमेरिका की चुनौती
ट्रंप ने कार्यक्रम में स्पष्ट चेतावनी दी कि चीन अब पनामा नहर पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की साजिश रच रहा है, जिसे अमेरिका किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा। वैश्विक व्यापार के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर चीन के बढ़ते प्रभाव को उन्होंने अमेरिका की सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए एक गंभीर खतरा बताया। ट्रंप ने कहा कि वे चीन की इस विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और पनामा नहर पर किसी भी विदेशी शक्ति के एकाधिकार को अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा।

थियोडोर रूजवेल्ट को ट्रंप की श्रद्धांजलि और वैचारिक समानता
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट को एक ‘बहुत खास व्यक्ति’ बताते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट न केवल अमेरिकी भावना और साहस के प्रतीक थे, बल्कि वे उन महान व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिनका ट्रंप लंबे समय से सम्मान करते आए हैं। नॉर्थ डकोटा के अपने दौरे का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे इस राज्य में मिली अपार सफलता और जनता के प्रेम के कारण यहां वापस आए हैं। उन्होंने रूजवेल्ट के जीवन को दृढ़ संकल्प और कभी हार न मानने की मिसाल करार दिया।
पनामा नहर का ऐतिहासिक संदर्भ और हस्तांतरण का लंबा सफर
पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपने की प्रक्रिया दशकों पुरानी है। यह 1977 की ऐतिहासिक ‘टॉरिजोस-कार्टर संधि’ का परिणाम थी, जो राष्ट्रपति जिमी कार्टर और पनामा के नेता उमर टॉरिजोस के बीच हुई थी। अमेरिका ने 1903 में इस क्षेत्र पर नियंत्रण प्राप्त किया था, जिसे लेकर दशकों तक पनामा में औपनिवेशिक हस्तक्षेप के खिलाफ गहरा आक्रोश था। 1964 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया था। अंततः, आपसी संबंधों में सुधार और पनामा की संप्रभुता का सम्मान करते हुए, 31 दिसंबर 1999 को नहर का पूर्ण नियंत्रण पनामा को सौंप दिया गया था।
ट्रंप की विदेश नीति और अमेरिका का भविष्य
पनामा नहर और चीन के मुद्दे के अलावा, ट्रंप ने वेनेजुएला और ईरान के प्रति अपनी पिछली नीतियों की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने वेनेजुएला में अमेरिका के हस्तक्षेप को प्रभावी बताते हुए कहा कि वे भविष्य में भी इसी तरह की कठोर और स्पष्ट नीतियों पर कायम रहेंगे। ट्रंप का यह बयान यह संकेत देता है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ अमेरिका की दबदबा वाली छवि को फिर से मजबूत करने के लिए पूरी तरह आक्रामक रुख अपना रहे हैं।
Read More : Afghanistan Earthquake : अफगानिस्तान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, देर रात तेज झटकों से दहशत में जागे हजारों लोग











