Middle East Crisis
Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच वैश्विक राजनीति में एक नया उबाल देखने को मिल रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों में से एक, ब्रिटेन को सीधे तौर पर धमकी दे डाली है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ का उपयोग करते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप की इस नाराजगी ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि ट्रंप ने ब्रिटेन को चेतावनी देने के साथ-साथ उनके हालिया सैन्य कदमों की कड़ी आलोचना की है।
ट्रंप की नाराजगी का मुख्य कारण ब्रिटेन द्वारा मिडिल ईस्ट के अशांत क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) भेजने का विचार करना है। अपनी पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि यूनाइटेड किंगडम, जो कभी अमेरिका का सबसे महान सहयोगी हुआ करता था, अब इस युद्ध की स्थिति में देरी से कदम उठा रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री स्टार्मर को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा, “कोई बात नहीं, प्रधानमंत्री स्टार्मर, हमें अब उनकी (ब्रिटेन के जहाजों की) ज़रूरत नहीं है—लेकिन हम इस व्यवहार को याद रखेंगे।” ट्रंप ने कड़े लहजे में आगे कहा कि अमेरिका को ऐसे लोगों या देशों की आवश्यकता नहीं है जो युद्ध जीतने के करीब पहुंचने के बाद उसमें शामिल होने का नाटक करें।
ब्रिटेन की इस सैन्य सक्रियता के पीछे का कारण हाल ही में साइप्रस में ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर हुए हमले हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की आग अब धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी फैल रही है, जिसके तहत साइप्रस में स्थित ब्रिटिश बेसों को निशाना बनाया गया था। इन ड्रोन हमलों के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सुरक्षात्मक रुख अपनाते हुए घोषणा की थी कि ब्रिटेन अपनी रक्षा और क्षेत्र में स्थिरता के लिए युद्धपोत और हेलीकॉप्टर तैनात कर रहा है। स्टार्मर ने साइप्रस के राष्ट्रपति को आश्वस्त किया था कि ब्रिटेन ड्रोन-रोधी क्षमता वाले उपकरणों और युद्धपोत ‘एचएमएस ड्रैगन’ को इस क्षेत्र में भेज रहा है।
ब्रिटेन का मानना है कि ‘एचएमएस ड्रैगन’ और उन्नत हेलीकॉप्टरों की तैनाती से उनके ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, लेकिन ट्रंप इसे केवल औपचारिकता मान रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि जब युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर है, तब ब्रिटेन की यह सक्रियता केवल एक दिखावा है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके नेतृत्व में अमेरिका अब सहयोगियों की “देर से आने वाली मदद” पर निर्भर नहीं रहेगा। यह बयान न केवल ब्रिटेन बल्कि अन्य नाटो (NATO) सहयोगियों के लिए भी एक संकेत माना जा रहा है कि ट्रंप की विदेश नीति अब और अधिक सख्त और ‘अमेरिका फर्स्ट’ के सिद्धांत पर आधारित है।
ट्रंप की इस चेतावनी ने ब्रिटेन के राजनीतिक हलकों में भी हड़कंप मचा दिया है। कीर स्टार्मर, जिन्होंने हाल ही में सत्ता संभाली है, उनके लिए अमेरिका जैसे बड़े सहयोगी के साथ संबंधों को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ट्रंप की “हम याद रखेंगे” वाली टिप्पणी भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सैन्य समझौतों पर असर डाल सकती है। जानकारों का मानना है कि मिडिल ईस्ट का यह युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि दुनिया के ताकतवर नेताओं के बीच भी दरारें पैदा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि ब्रिटेन इस सार्वजनिक अपमान और चेतावनी का जवाब कूटनीतिक स्तर पर कैसे देता है।
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