Gujarat Businessman Fraud: कोक एक्सपोर्ट के नाम पर गुजरात के गांधीधाम निवासी एक कोक व्यवसायी से 89 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपितों को गुजरात पुलिस ने नगर पंचायत कुरूद से गिरफ्तार किया है। ये दोनों आरोपी नेहरू नगर, भिलाई के रहने वाले हैं। जबकि इस मामले के दो अन्य आरोपित अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। आरोपितों पर अहमदाबाद, मुंबई और कोलकाता में भी लगभग 200 करोड़ रुपये के बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस ने पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू कर रखी है।
गुजरात पुलिस को सूचना मिली थी कि भिलाई में रहने वाले संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल लंबे समय से नगर पंचायत कुरूद में अपने रिश्तेदार, जो कि एक भाजपा नेता हैं, के घर शरण लिए हुए हैं। पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को कुरूद पहुंचकर दबिश दी और देर रात दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
यह भी सामने आया है कि आरोपितों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण गिरफ्तारी में काफी देरी हुई। गिरफ्तारी के वक्त स्थानीय स्तर पर भारी अड़चनें सामने आईं, लेकिन अंततः पुलिस ने कार्रवाई कर दोनों आरोपितों को पकड़ा। 18 सितंबर को उन्हें सिविल कोर्ट कुरूद में ट्रांजिट रिमांड पर पेश किया गया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गुजरात भेज दिया।
गुजरात के गांधीधाम निवासी व्यवसायी पवन मोर ने आठ फरवरी 2025 को आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। शिकायत में बताया गया कि संजय अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, संदीप अग्रवाल और राखी अग्रवाल ने मिलकर कोक एक्सपोर्ट के नाम पर 89 करोड़ रुपये की ठगी की है।
इसके अलावा आरोपितों पर अहमदाबाद, मुंबई और कोलकाता में करीब 200 करोड़ रुपये के अन्य धोखाधड़ी के मामलों में भी जांच चल रही है। पुलिस अब फरार संदीप अग्रवाल और राखी अग्रवाल की भी तलाश कर रही है।
धमतरी जिले के कुरूद नगर में भाजपा नेता के घर शरण लिए दोनों आरोपितों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की बात से इलाके में बड़ी हलचल मची है। स्थानीय लोग इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कैसे करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले आरोपितों को शरण मिल पाई।
यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों में ऐसी छूट मिलने से लोगों का प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो सकता है।
गुजरात पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही हैं। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। साथ ही राजनीतिक संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की संभावना है।
89 करोड़ रुपये के कोक एक्सपोर्ट घोटाले में दो आरोपितों की भिलाई से गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हुआ है कि बड़ी रकम की धोखाधड़ी करने वालों को भी अब बचना मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि राजनीतिक संरक्षण की वजह से कई बार जांच प्रभावित होती है, लेकिन कड़क कार्रवाई से ऐसे अपराधियों पर लगाम लगना जरूरी है। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है।
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