G20 Summit 2027 : रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनाव के बीच ब्रिटेन ने अगले साल होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2027 में मैनचेस्टर में आयोजित होने वाले जी-20 सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर रूस और पश्चिमी देशों के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नवंबर 2027 में मैनचेस्टर में होगा जी-20 सम्मेलन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने यह बात द इकोनॉमिस्ट की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही। वर्ष 2027 का जी-20 शिखर सम्मेलन नवंबर में ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। मैनचेस्टर इंग्लैंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित प्रमुख शहर है। बर्नहम इस शहर के पूर्व मेयर भी रह चुके हैं। हालांकि, उनके कार्यालय की ओर से इस बयान पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया गया।

अमेरिका के पुतिन को न्योते पर भी जारी है विवाद
ब्रिटेन का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका की ओर से रूसी राष्ट्रपति पुतिन को दिसंबर में मियामी में होने वाली जी-20 बैठक के लिए आमंत्रित किए जाने पर विवाद जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए इस निमंत्रण को लेकर यूरोपीय देशों में असहमति देखने को मिली है।

अमेरिका का मानना है कि इस बैठक में पुतिन को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के अन्य नेताओं के साथ बातचीत करने का अवसर मिल सकता है। इसके जरिए यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और शांति योजना पर चर्चा की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं। वहीं, रूस ने अमेरिकी निमंत्रण की सराहना की है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुतिन इसमें शामिल होंगे या नहीं।
यूरोपीय देशों ने अमेरिका के फैसले पर उठाए सवाल
अमेरिका की ओर से पुतिन को आमंत्रित किए जाने के बाद यूरोप के कई देशों ने इस कदम की आलोचना की थी। वर्ष 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किए जाने के बाद से यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटे हैं।

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी इस फैसले को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि मॉस्को अमेरिकी निमंत्रण को अपनी आक्रामक नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन के रूप में देख सकता है। यूरोपीय देशों की चिंता है कि रूस के प्रति नरम रुख अपनाने से यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव कमजोर पड़ सकता है।
पुतिन के साथ इस व्यवहार पर यूरोपीय संघ ने जताई नाराजगी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पुतिन के साथ इस तरह का व्यवहार समझना बेहद मुश्किल है। यूरोपीय देशों के बीच इस बात को लेकर मतभेद दिखाई दे रहे हैं कि रूस के साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाया जाए या उस पर दबाव बनाए रखा जाए।
यूक्रेन युद्ध के बाद से जी-20 बैठकों से दूर हैं पुतिन
रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस का सैन्य हमला माना जाता है। इसके बाद से पुतिन की अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भागीदारी सीमित रही है। वह यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से व्यक्तिगत रूप से जी-20 शिखर सम्मेलनों में शामिल नहीं हुए हैं।
उनकी गैरमौजूदगी को पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट से भी जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी भागीदारी को लेकर कई तरह की कूटनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं।
क्या मैनचेस्टर सम्मेलन में रूस की भागीदारी होगी?
रूस अभी भी जी-20 का सदस्य है। ऐसे में ब्रिटेन के फैसले को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि सम्मेलन में रूस का प्रतिनिधित्व किस स्तर पर होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, बर्नहम ने तकनीकी स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जी-20 के निमंत्रण से जुड़ी प्रक्रिया समूह के स्तर पर संचालित होती है, लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों के चलते पुतिन सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे।
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