Kalimpong Forest Fire : पश्चिम बंगाल के कालिम्पोंग जिले में स्थित चालता फॉरेस्ट में भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया है। जंगल के बड़े हिस्से में आग फैलने के कारण पेड़-पौधों और वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। आग की लपटें तेजी से जंगल के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रही हैं, जिससे छोटे-बड़े पेड़ों के जलने की आशंका बढ़ गई है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता का माहौल है। लोगों को डर है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो जंगल के बड़े क्षेत्र को नुकसान पहुंच सकता है।
कालिम्पोंग के चालता फॉरेस्ट में तेजी से फैल रही आग
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, चालता फॉरेस्ट के एक हिस्से में लगी आग धीरे-धीरे आसपास के जंगल तक फैल गई। आग की तीव्रता देखकर स्थानीय लोग चिंतित हैं। जंगल में मौजूद सूखे पेड़ और पत्तियां आग को तेजी से फैलने में मदद कर सकती हैं। ऐसे में आग पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ, तो वन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ सकता है। फिलहाल आग से प्रभावित जंगल के वास्तविक क्षेत्र और नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

आग लगने की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं
चालता फॉरेस्ट में आग कैसे लगी, इसकी असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। स्थानीय सूत्रों के हवाले से आशंका जताई जा रही है कि सूखे काशिया के पेड़ में किसी व्यक्ति ने जानबूझकर आग लगाई हो सकती है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में आग इसी हिस्से में लगी और बाद में तेज हवा तथा आसपास मौजूद सूखी वनस्पति के कारण जंगल के दूसरे क्षेत्रों तक फैल गई। हालांकि, जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आग लगने के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

पहाड़ी जंगल तक पहुंची आग तो बढ़ सकती है परेशानी
चालता फॉरेस्ट के आसपास पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आग को लेकर चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि आग की लपटें पहाड़ पर मौजूद जंगल तक पहुंच गईं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में आग फैलने के बाद उस पर नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे वन संपदा को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचने की आशंका है। फिलहाल लोगों की चिंता इस बात को लेकर है कि आग को पहाड़ी वन क्षेत्र तक पहुंचने से कैसे रोका जाए।
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर मंडराया खतरा
चालता फॉरेस्ट में कई प्रकार के वन्यजीवों की मौजूदगी बताई जाती है। जंगल में आग फैलने से इन जीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच सकता है। आग और धुएं के कारण वन्यजीव सुरक्षित स्थानों की तलाश में जंगल से बाहर निकल सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है। इससे वन्यजीवों के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि जंगल और उसमें रहने वाले जीवों को बचाने के लिए आग पर जल्द नियंत्रण जरूरी है।

कोलकाता के होटल में आग से गई थी 9 लोगों की जान
जंगल में आग की इस घटना के बीच कुछ महीने पहले कोलकाता के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड की घटना भी चर्चा में है। उस हादसे में दो महिलाओं और एक बच्चे समेत कुल नौ लोगों की मौत हो गई थी। होटल में ठहरे लोगों के अनुसार, रात करीब 2 बजकर 20 मिनट पर चीख-पुकार सुनकर उनकी नींद खुली थी। जब लोगों ने नीचे उतरकर बाहर निकलने की कोशिश की, तो दूसरी मंजिल पर आग लगी होने के कारण रास्ता बंद मिला।
होटल की छत पर पहुंचकर लोगों ने बचाई थी जान
होटल में फंसे कई लोगों ने जान बचाने के लिए इमारत की छत का सहारा लिया था। बताया गया कि वहां इलाज कराने के लिए कोलकाता आए कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि होटल में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। इमारत के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठे थे। काफी मशक्कत के बाद दमकलकर्मियों और पुलिस ने होटल के अंदर फंसे करीब 60 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था। इस घटना ने एक बार फिर आग से सुरक्षा के इंतजामों की अहमियत सामने ला दी थी।

