Chagos Islands Deal
Chagos Islands Deal: हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चागोस द्वीपसमूह को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। ब्रिटेन की कीर स्टार्मर सरकार ने संसद में घोषणा की है कि उसने इस द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपने की चल रही प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह फैसला वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। ब्रिटेन का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े विरोध का परिणाम माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने डिएगो गार्सिया सैन्य ठिकाने की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। ब्रिटेन के इस फैसले ने अफ्रीका और एशिया के बीच स्थित इस समुद्री क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को एक बार फिर गरमा दिया है।
बुधवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में ब्रिटेन के विदेश और कॉमनवेल्थ मंत्री हामिश फाल्कनर ने एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ चल रही उच्च स्तरीय बातचीत पूरी होने तक चागोस समझौते को अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया को रोक दिया गया है। हालांकि, फाल्कनर के इस बयान के बाद हड़कंप मच गया, जिसके तुरंत बाद ब्रिटेन के विदेश विभाग को सफाई देनी पड़ी। विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि तकनीकी रूप से “कोई औपचारिक रोक” नहीं है और न ही इसकी कोई समय सीमा तय की गई थी। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन किसी भी स्थिति में अमेरिकी समर्थन के बिना आगे नहीं बढ़ना चाहता और वाशिंगटन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
चागोस द्वीपसमूह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा डिएगो गार्सिया है, जहाँ अमेरिका का एक विशाल और रणनीतिक सैन्य बेस स्थित है। यह बेस हिंद महासागर में अमेरिकी सैन्य अभियानों का मुख्य केंद्र है। मूल समझौते के तहत, ब्रिटेन और अमेरिका को इस बेस पर अगले 99 वर्षों तक नियंत्रण बनाए रखने की अनुमति दी जानी थी। ब्रिटिश अधिकारियों ने दोहराया है कि संसद में इस सौदे से जुड़ी प्रक्रिया अभी जारी है और सही समय आने पर इसे पेश किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि ब्रिटेन अब “इंतजार करो और देखो” की नीति अपना रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को लेकर अपना रुख बेहद आक्रामक कर लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कीर स्टार्मर सरकार द्वारा द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपना एक “ऐतिहासिक भूल” साबित होगी। ट्रंप का मानना है कि इससे क्षेत्र में चीन का प्रभाव बढ़ सकता है और अमेरिकी सैन्य हितों को नुकसान पहुँच सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने पहले इस समझौते का समर्थन करने के संकेत दिए थे, लेकिन इस महीने की शुरुआत में उन्होंने अचानक अपना स्टैंड बदलते हुए इसे पूरी तरह रोकने की चेतावनी दे दी।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पिछले साल इस सौदे पर अपनी सहमति जताई थी। इस समझौते के तहत ब्रिटेन को डिएगो गार्सिया पर सैन्य आधार बनाए रखने के बदले हर साल लगभग 35 अरब डॉलर का भारी-भरकम भुगतान करना था। अब स्टार्मर सरकार एक दोराहे पर खड़ी है; एक तरफ मॉरीशस और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दबाव है कि वे उपनिवेशवाद के इस अंतिम अवशेष को समाप्त करें, और दूसरी तरफ सबसे करीबी सहयोगी अमेरिका की नाराजगी का खतरा है। फिलहाल, ब्रिटिश सरकार इस समझौते को बचाने और अमेरिका को मनाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
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