Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन अब तक युद्धविराम की कोई संभावना नहीं दिख रही है। इसके उलट, संघर्ष दिन-ब-दिन और अधिक खतरनाक रूप लेता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेनी सेना ने रूसी कब्जे वाले क्राइमिया के तेल भंडारण केंद्रों पर बड़ा हमला किया है, जिससे वहां भीषण आग लग गई। इस हमले के बाद सवाल उठने लगे हैं – क्या अब रूसी सेना युद्ध में पीछे हट रही है?
यूक्रेन का बड़ा दावा – हथियार निर्माण का केंद्र था क्राइमिया
यूक्रेन ने दावा किया है कि क्राइमिया के जिस क्षेत्र पर हमला किया गया, वहां रूस घातक मिसाइलें और बम तैयार कर रहा था। यूक्रेनी सेना का कहना है कि यह ऑपरेशन रूस की सैन्य आक्रामकता के खिलाफ था। सूत्रों के अनुसार, यूक्रेन ने इस हमले के लिए 100 से अधिक ड्रोनों का इस्तेमाल किया। वहीं, रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने एक ही रात में 251 यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराया।
पुतिन की मुश्किलें बढ़ीं
गौरतलब है कि रूस ने 2014 में क्राइमिया पर कब्जा कर लिया था और तब से यह क्षेत्र रूसी सेना के लिए एक महत्वपूर्ण आपूर्ति केंद्र बना हुआ है। यहां से युद्ध के लिए आवश्यक तेल और सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति होती रही है। ऐसे में क्राइमिया पर यूक्रेन का यह ताजा हमला रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह हमला सिर्फ रणनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तौर पर भी रूस के लिए एक बड़ा नुकसान है।
ऑपरेशन स्पाइडरवेब के बाद फिर बड़ा हमला
इससे पहले जून 2025 में यूक्रेन ने रूस की धरती पर ऑपरेशन स्पाइडरवेब चलाया था, जिसमें 100 से अधिक ड्रोनों का उपयोग कर हमले किए गए थे। यह सिलसिला अब भी जारी है। क्राइमिया पर यह हमला उसी रणनीतिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत यूक्रेन रूसी आपूर्ति श्रृंखला और सैन्य तैयारियों को निशाना बना रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप से फिर मिलेंगे जेलेंस्की
ऐसे समय में जब युद्ध की आग भड़क रही है, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फिर मुलाकात की योजना बनाई है। जेलेंस्की का दावा है कि वे ट्रंप से यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर गारंटी और रूस पर कड़े प्रतिबंधों की मांग करेंगे। कीव का साफ कहना है कि जब तक रूस युद्धविराम के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उस पर सख्त वैश्विक प्रतिबंध लगाए जाएं।
क्राइमिया पर हुआ ताजा हमला यह दिखाता है कि यूक्रेन युद्ध में रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति अपना रहा है। ऐसे हमलों से रूस की युद्ध क्षमता को सीधा नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, यह कहना जल्दबाज़ी होगा कि रूसी सेना पूरी तरह से घिर चुकी है, लेकिन हालिया घटनाएं यह जरूर दर्शाती हैं कि यूक्रेन की रणनीति ने रूस को चिंतित कर दिया है। आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा क्या होगी, इसका जवाब समय ही देगा।
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