अंतरराष्ट्रीय

Iran UN sanctions: ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के सख्त प्रतिबंध: 2015 के परमाणु समझौते की फिर से चर्चा में वापसी

Iran UN sanctions : संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उस पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। यह फैसला वर्ष 2015 में हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते (JCPOA) के तहत बनाए गए स्नैपबैक मैकेनिज्म के तहत लिया गया है। इस कदम ने न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है, बल्कि पश्चिम एशिया में तनाव को भी और बढ़ा दिया है।

क्या है 2015 का परमाणु समझौता (JCPOA)?

साल 2015 में ईरान और अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था जिसे Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है। इसका मकसद था ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित कर उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना। इसके बदले ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए गए थे।

स्नैपबैक मैकेनिज्म क्या है?

इस समझौते में एक प्रावधान था जिसे “स्नैपबैक मैकेनिज्म” कहा जाता है। इसके अनुसार, यदि कोई भी देश यह दावा करता है कि ईरान समझौते का पालन नहीं कर रहा, तो बिना सुरक्षा परिषद की मंजूरी के भी 30 दिनों के अंदर सभी पुराने प्रतिबंध फिर से लागू किए जा सकते हैं।

किन चीजों पर लगे हैं प्रतिबंध?

UN द्वारा लगाए गए ताजा प्रतिबंधों में शामिल हैं:

  • हथियारों की बिक्री और खरीद पर रोक (आर्म्स एम्बार्गो)

  • बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर प्रतिबंध

  • ईरानी संपत्तियों को फ्रीज करना

  • यात्रा प्रतिबंध और तकनीकी ट्रांसफर पर रोक

क्यों लगाए गए हैं ये प्रतिबंध?

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने आरोप लगाया है कि ईरान ने JCPOA का उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की सीमा पार की है और अपने मिसाइल कार्यक्रम को तेज किया है। इन देशों का मानना है कि ईरान धीरे-धीरे परमाणु हथियारों की दिशा में बढ़ रहा है।

ईरान का जवाब

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पष्ट किया कि उनका देश परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता और कभी इसकी कोशिश भी नहीं की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान, परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर नहीं निकलेगा।

हालांकि, ईरान ने तीनों यूरोपीय देशों – जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन में अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है। ईरानी सरकार ने इस कदम को “गैर-जिम्मेदाराना” बताया है और कहा है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा होगा।

रूस का विरोध

रूस ने इस कदम को अवैध बताया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यह प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है और इसे मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के ये नए प्रतिबंध न केवल उसकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेंगे, बल्कि पहले से अस्थिर मिडिल ईस्ट में तनाव की लपटों को भी हवा दे सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में कूटनीति किस दिशा में जाती है—टकराव की ओर या समाधान की ओर।

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