UP Journalist Murder: उत्तर प्रदेश के पत्रकार हत्याकांड: एनकाउंटर में मारे गए शूटर भाई, दोनों पर था 1-1 लाख का इनाम

UP Journalist Murder: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में चर्चित पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड के दोनों शूटरों को STF ने गुरुवार सुबह मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, दोनों बदमाश—राजू उर्फ रिजवान और संजय उर्फ अकील खान—सगे भाई थे और उन पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों की तलाश में STF और पुलिस की टीमें बीते 5 महीने से जुटी थीं।

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कैसे हुआ एनकाउंटर?

एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि STF को पिसावा थाना क्षेत्र में शूटरों की मूवमेंट की सूचना मिली थी। गुरुवार सुबह टीम चेकिंग कर रही थी, तभी बाइक सवार दोनों शूटर वहां पहुंचे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों को गोली लगी। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

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कौन थे दोनों शूटर?

राजू और संजय मिश्रिख थाना क्षेत्र के अटवा गांव के रहने वाले थे। इनकी मां हिंदू और पिता मुस्लिम हैं। दोनों पर पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था। 8 मार्च 2025 को इन्होंने लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की बाइक रोककर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी, जिसमें उनकी मौत हो गई थी।

हत्या की साजिश क्यों रची गई?

पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश महोली के कारेदेव बाबा मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर ने रची थी। राघवेंद्र ने पुजारी को मंदिर परिसर में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। डर था कि पत्रकार ये बात उजागर कर देंगे, इसलिए दो शूटरों को सुपारी देकर उनकी हत्या करवा दी गई। इस केस में मुख्य आरोपी शिवानंद बाबा और दो अन्य आरोपियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।

कब और कैसे हुई थी हत्या?

पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी महोली कस्बे के निवासी और एक राष्ट्रीय अखबार में तहसील संवाददाता थे। 8 मार्च को वह बाइक से घर लौट रहे थे, तभी हेमपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास ओवरब्रिज पर बदमाशों ने उन्हें गोलियों से भून दिया। तीन गोलियां उनके सीने और कंधे में लगी थीं।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था और पुलिस से तीखी झड़प भी हुई थी। लोगों में आक्रोश इतना था कि एक इंस्पेक्टर का कॉलर तक पकड़ लिया गया था।

33 दिन बाद हुआ था केस का खुलासा

पुलिस ने जांच में धान खरीद घोटाले, व्यक्तिगत रंजिश और अन्य कोणों की जांच की। 4000 से ज्यादा मोबाइल नंबर सर्विलांस पर रखे गए और 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई। CCTV फुटेज और तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने शिवानंद बाबा और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया था।

अब शूटरों के मारे जाने के बाद माना जा रहा है कि यह हत्याकांड पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। पुलिस की नजर अब इस मामले से जुड़े बाकी साजिशकर्ताओं और समर्थन देने वालों पर है।

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