UP Politics : उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने एक ऐसा सियासी दावा किया है, जिसने राज्य के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। राजभर का कहना है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर बहुत बड़ी ऐतिहासिक टूट होने जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें एक बेहद गोपनीय पत्र सौंपा है। राजभर के मुताबिक, प्रदेश में हुए पूर्ववर्ती खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले का असली मास्टरमाइंड कौन है, यह बात पूरा उत्तर प्रदेश अच्छी तरह जानता है। अब जब इन घोटालों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है, तो पूरी समाजवादी पार्टी गहरी परेशानी और घबराहट में है।

महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से भी बड़ा खेला होने का अनुमान
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने देश के अन्य राज्यों की राजनीतिक उठापटक का जिक्र करते हुए कहा कि अब लोगों को महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की चर्चा छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि उत्तर प्रदेश में उससे भी बड़ा उलटफेर होने वाला है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों को छोड़िए, यहाँ तो पूरी की पूरी समाजवादी पार्टी ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी है। राजभर ने तुलना करते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसद बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना गुट के 9 में से 6 सांसदों के टूटने और शिंदे गुट में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन यूपी का यह घटनाक्रम इन सबसे कहीं ज्यादा बड़ा और व्यापक होने जा रहा है।
अमित शाह और रामगोपाल यादव की मुलाकात पर बड़ा खुलासा
अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर मंत्री राजभर ने कहा, ‘राजभर जो कुछ भी बोलता है, हमेशा सीना ठोककर और पूरी जिम्मेदारी के साथ बोलता है। उत्तर प्रदेश में शत-प्रतिशत समाजवादी पार्टी बिखरने की कगार पर खड़ी है।’ उन्होंने आगे सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि रामगोपाल यादव ने भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं और सांसदों की एक बकायदा लंबी सूची तैयार की है और यही चिट्ठी उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को दिल्ली में सौंपी है। राजभर ने दावा किया कि उन्होंने खुद उन दोनों नेताओं के चेहरों की मुस्कुराहट देखी है। उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा कि जहां दो दिलों की मुलाकात होती है, वहां भले ही जुबान चुप रहे, लेकिन इशारों में बड़ी बात हो जाती है।
गोपनीय पत्र के मजमून और आगामी रणनीति का किया जिक्र
राजभर ने उस कथित पत्र के भीतर लिखी बातों का जिक्र करते हुए दावा किया कि चिट्ठी में साफ तौर पर लिखा गया है कि ‘हमारी राजनीतिक जान बची रहे, हम आपके साथ आने को पूरी तरह तैयार हैं।’ इस पत्र के माध्यम से सपा के कई कद्दावर नेता और मौजूदा सांसद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में आ चुके हैं। जब राजभर से उन बागी होने वाले नेताओं के नामों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रहस्य बरकरार रखते हुए कहा कि अगर वह अभी ही सारे नाम सार्वजनिक कर देंगे तो पूरी रणनीति और काम बेकार हो जाएगा। इसलिए जनता और मीडिया को कुछ दिनों का इंतजार करना चाहिए, बहुत जल्द सब कुछ साफ हो जाएगा।
जांच एजेंसियों के डर और परिवार की साख बचाने की कवायद
सुभासपा प्रमुख ने सपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस समय पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने सिर्फ अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत जान बचाने का संकट है। वे अपनी साख बचाने के लिए चौतरफा परेशान हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने शासनकाल में भ्रष्टाचार और चोरी की है, उनके खिलाफ सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कड़ी जांच चल रही है। इन गंभीर जांचों के बाद समाजवादी पार्टी का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह अंधकारमय है।
यही कारण है कि रामगोपाल यादव ने यह सोची-समझी रणनीति बनाई है कि भले ही पार्टी के सांसद और विधायक चले जाएं, लेकिन परिवार पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। नेता तो बाद में भी नए बना लिए जाएंगे, पहले अपनी राजनीतिक जान बचाना जरूरी है। राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए अंत में कहा कि टिन्नू यादव जैसे नेता अयोध्या के संवेदनशील मामले पर सिर्फ राजनीति का खेल खेल रहे हैं, जबकि असलियत यह है कि ये लोग हमेशा दलितों, पिछड़ों और यादवों के साथ केवल अन्याय करते आए हैं।
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