UP Voter List Controversy : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के बाद अब स्पेशल समरी रिवीजन (SSR), फॉर्म-6 और फॉर्म-7 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग को घेरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें मतदाता सूची से 1 करोड़ 27 लाख हिंदू मतदाताओं के नाम गायब होने का दावा किया गया था।
1.27 करोड़ हिंदू वोटरों के नाम गायब होने पर अखिलेश का सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में दावा किया था कि उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से करीब 1.27 करोड़ हिंदू वोटरों के नाम गायब हैं। इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर उन्हें इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने की जानकारी कहां से मिली?

सपा अध्यक्ष ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से संबंधित पूरा आंकड़ा मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ साझा किया है? उन्होंने कहा कि जब मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, तो मुख्यमंत्री के पास यह आंकड़ा किस आधार पर पहुंचा? अखिलेश ने इस जानकारी के स्रोत और इसकी प्रमाणिकता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

SIR और SSR के बाद फॉर्म-7 को लेकर साजिश का आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले SIR कराया गया और अब SSR के माध्यम से मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम कटवाने की साजिश हो सकती है।
दरअसल, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। वहीं, फॉर्म-7 के जरिए किसी मतदाता के नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। अखिलेश यादव का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल करके मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा सकती है।

फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में बदलाव को लेकर भी उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में किए जा रहे बदलावों को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों के पीछे फर्जी वोट बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र को अलग करने का फैसला किया है। अब ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में फॉर्म-6 और SIR से संबंधित घोषणा अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसे में अखिलेश यादव ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है।
2027 में बीजेपी की विदाई का अखिलेश यादव ने किया दावा
मतदाता सूची के मुद्दे पर बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरने के साथ अखिलेश यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी के नेता उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने आए थे और अब जनता उन्हें प्रदेश से बाहर का रास्ता दिखाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को जनता का समर्थन मिलेगा। इससे पहले भी सपा प्रमुख मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित तौर पर वोटरों के नाम काटे जाने को लेकर चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतें रखने की बात कह चुके हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर टिकी राजनीतिक निगाहें
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अब चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ बीजेपी की ओर से 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम गायब होने का दावा किया गया है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इस आंकड़े के आधार और पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।


