Urad Dal MSP
Urad Dal MSP: उत्तर प्रदेश के दलहन किसानों के लिए योगी सरकार और केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी सौगात सामने आई है। ‘आत्मनिर्भर दाल योजना’ के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) ने प्रदेश के किसानों से सीधे उड़द खरीदने का फैसला किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना और बिचौलियों के चंगुल से मुक्त करना है। नेफेड द्वारा प्रदेश के प्रमुख उत्पादक जिलों में विशेष खरीद केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ पारदर्शी तरीके से फसल की तुलाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अपर निदेशक (प्रसार) आर.के. सिंह ने एक विशेष बातचीत में बताया कि नेफेड प्रदेश के 17 महत्वपूर्ण जिलों में कुल 50 उड़द खरीद केंद्र खोलने की प्रक्रिया में है। इस सीजन के लिए सरकार ने उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह मूल्य बाजार में प्रचलित दरों की तुलना में किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। इन केंद्रों के खुलने से किसानों को अब अपनी फसल औने-पौने दामों पर स्थानीय व्यापारियों को बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी।
अपर निदेशक आर.के. सिंह के अनुसार, खरीद केंद्रों पर पंजीकरण की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है और बहुत जल्द वास्तविक खरीद भी प्रारंभ कर दी जाएगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होगी। किसान अपनी मेहनत की कमाई का पूरा हिस्सा प्राप्त कर सकेंगे। जिन जिलों में उड़द की बंपर पैदावार होती है, वहां केंद्रों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है ताकि किसी भी किसान को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
उत्तर प्रदेश के वे जिले जहाँ उड़द की खेती प्रमुखता से की जाती है, उन्हें इस योजना में प्राथमिकता दी गई है। इन जिलों की सूची इस प्रकार है:
बुंदेलखंड क्षेत्र: ललितपुर, झांसी, महोबा, जालौन और हमीरपुर।
रुहेलखंड और मध्य यूपी: बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, रामपुर, मुरादाबाद, संभल और हरदोई।
अन्य जिले: लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, बुलंदशहर और सोनभद्र। इन सभी जिलों के किसान अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर सरकारी दर पर अपनी उपज बेच सकते हैं।
यह पूरी खरीद नेफेड की महत्वाकांक्षी ‘आत्मनिर्भर दाल योजना’ के तहत की जा रही है। इस योजना का लक्ष्य भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उड़द की सरकारी खरीद 29 जनवरी 2026 तक निरंतर चलेगी। भुगतान प्रक्रिया को लेकर किसानों को बड़ी राहत दी गई है; फसल बेचने के मात्र तीन कार्य दिवसों (3 Working Days) के भीतर भुगतान की पूरी राशि सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते (DBT) में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके लिए दो आसान तरीके उपलब्ध हैं:
ई-समृद्धि ऐप: किसान अपने मोबाइल से इस ऐप के जरिए स्वयं रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
नेफेड केंद्र: किसान अपने नजदीकी नेफेड केंद्र पर जाकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीकरण करा सकते हैं। उड़द न केवल एक पौष्टिक दाल है, बल्कि इसका उपयोग कचौड़ी, पापड़, बड़ी, इडली और डोसा जैसे विविध व्यंजन बनाने में भी होता है। उचित दाम मिलने से प्रदेश में दलहन की खेती का रकबा बढ़ने की भी पूरी संभावना है
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