Trump court loss: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और कानूनी झटका मिला है। अमेरिकी कोर्ट ने पॉसे कॉमिटेटस एक्ट के उल्लंघन के लिए ट्रंप प्रशासन की निंदा करते हुए, नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती को गैरकानूनी करार दिया है। यह मामला 2024 की गर्मियों में लॉस एंजिल्स में सैन्य बलों की तैनाती से जुड़ा है, जिसे ट्रंप सरकार ने आव्रजन विरोध प्रदर्शनों को काबू में लाने के लिए लागू किया था।

क्या है पॉसे कॉमिटेटस एक्ट?
पॉसे कॉमिटेटस एक्ट 1878 एक अमेरिकी संघीय कानून है, जो घरेलू कानून प्रवर्तन के लिए सेना या सैन्य बलों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है। इसका मकसद है कि नागरिक मामलों में सैन्य हस्तक्षेप न हो और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं सुरक्षित रहें।

कोर्ट का फैसला: ट्रंप प्रशासन ने कानून तोड़ा
2 सितंबर को वाशिंगटन में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ब्रेयर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने लॉस एंजिल्स में 4,000 नेशनल गार्ड सैनिकों और 700 अमेरिकी मरीन की तैनाती कर कानून का उल्लंघन किया। कोर्ट ने इस कदम को राजनीतिक असंतोष को दबाने की कोशिश बताया और कहा कि यह तैनाती संवैधानिक सीमाओं के बाहर थी।हालांकि कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से फैसले को लागू नहीं किया, बल्कि 12 सितंबर तक की रोक लगाई है, ताकि ट्रंप पक्ष को अपील करने का अवसर मिल सके।
ट्रंप प्रशासन की दलील
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पॉसे कॉमिटेटस एक्ट इस मामले में लागू नहीं होता क्योंकि सैनिकों को आव्रजन कानून लागू करने के लिए नहीं, बल्कि फेडरल संपत्तियों की सुरक्षा और एजेंटों की सहायता के लिए तैनात किया गया था। उनके अनुसार, राष्ट्रपति को संविधान के तहत आपातकालीन परिस्थितियों में सैन्य बल के उपयोग का अधिकार है।
कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर की याचिका से शुरू हुआ मामला
यह मामला तब सामने आया जब कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने कोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने सैन्य ताकत का इस्तेमाल करके लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे संविधान और संघीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
पहले भी मिला था झटका
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप के फैसलों को अदालत से चुनौती मिली हो। इससे पहले टैरिफ लागू करने के फैसले को भी अदालत ने असंवैधानिक बताया था, हालांकि उस पर रोक नहीं लगाई गई थी। ऐसे में ट्रंप को ऊपरी अदालत में अपील का रास्ता मिल गया था।
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़े फैसलों को लगातार कानूनी चुनौती मिल रही है। कोर्ट का यह ताजा फैसला न केवल पॉसे कॉमिटेटस एक्ट की अहमियत को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी बताता है कि संविधान के बाहर जाकर उठाए गए कदमों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।










