US India Defence : अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो 3 से 8 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच Major Defense Partnership को आगे बढ़ाना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत करना है। दौरे के दौरान रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उच्चस्तरीय बातचीत होने की संभावना है।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और उभरती तकनीक पर जोर
एडमिरल पापारो भारत में अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे। बातचीत में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, उभरती प्रौद्योगिकियों और रणनीतिक स्थिरता जैसे विषयों को प्रमुखता दिए जाने की जानकारी है। तेजी से बदलते तकनीकी माहौल के बीच दोनों देश रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल और आपसी सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विचार करेंगे।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा अहम मुद्दा
दौरे में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता भी महत्वपूर्ण विषय रहेगी। भारत और अमेरिका इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहित विभिन्न रक्षा मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। एडमिरल पापारो की भारत यात्रा के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा केंद्रित रहने की उम्मीद है।
भारत पहुंचने पर हुआ स्वागत
भारत पहुंचने के बाद अमेरिकी कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो का स्वागत किया गया। उनके दौरे को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान भारतीय अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के मौजूदा ढांचे और आगे की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाएगी।
समुद्री सुरक्षा सहयोग पर विशेष फोकस
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में समुद्री सुरक्षा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। एडमिरल पापारो के दौरे के दौरान Maritime Security से जुड़े विषयों पर भी बातचीत होगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
रक्षा ऊर्जा सुरक्षा पर भी होगी बातचीत
दोनों पक्ष Defence Energy Resilience यानी रक्षा क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन से जुड़े विषयों पर भी विचार करेंगे। आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में दोनों देश रक्षा क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों और संभावित सहयोग के अवसरों पर चर्चा कर सकते हैं। इसके साथ ही तकनीकी बदलावों के बीच रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के मुद्दे पर भी बातचीत होगी।
भविष्य की चुनौतियों के लिए साझेदारी मजबूत करने की कोशिश
तेजी से बदलते Technology Landscape और उभरती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत और अमेरिका रक्षा सहयोग के नए क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं। Emerging Technologies से लेकर Maritime Security तक, दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ाने की कोशिश जारी है। एडमिरल पापारो का दौरा इसी व्यापक रक्षा साझेदारी में आगे की प्राथमिकताओं को लेकर बातचीत का अवसर प्रदान करेगा।
हिंद महासागर क्षेत्र पर भी नजर
एडमिरल पापारो की यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा हितों और मौजूदगी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। भारत के लिए यह दौरा समुद्री डोमेन, रक्षा तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के दृष्टिकोण से अहम हो सकता है। दोनों पक्ष क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा हितों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।
दुनिया की बड़ी सैन्य कमान का नेतृत्व
एडमिरल सैमुअल जे. पापारो वर्तमान में अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान का नेतृत्व कर रहे हैं। यह अमेरिका की प्रमुख सैन्य कमानों में से एक है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके नेतृत्व वाली कमान के तहत करीब 4 लाख सैन्य और असैन्य कर्मी, पांच एयरक्राफ्ट कैरियर, लगभग 200 युद्धपोत और 1,000 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। उनका भारत दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय सैन्य संपर्क को दर्शाता है।
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