US India Tariff War
US India Tariff War: वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई अनिश्चितता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनियों ने भारतीय बाजारों में हलचल मचा दी है। ट्रंप द्वारा भारत पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के संकेतों के बाद न केवल शेयर बाजार में गिरावट आई है, बल्कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है। हालांकि, भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में अपनी ऊर्जा नीति और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगी। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमेरिकी टैरिफ की आशंका का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर देखने को मिला है। निवेशकों में घबराहट के चलते बीते पांच कारोबारी सत्रों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (Sensex) लगभग 2000 अंक टूट चुका है। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 2 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को सतर्क कर दिया है, जिससे भारतीय बाजार से पूंजी की निकासी तेज हुई है।
आर्थिक मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। आरबीआई के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9.81 अरब डॉलर घटकर 686.80 अरब डॉलर रह गया है। यह गिरावट इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि इससे ठीक एक सप्ताह पहले भंडार में 3.29 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी और यह 696.61 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच गया था। एक सप्ताह के भीतर करीब 10 अरब डॉलर की यह कमी हालिया वैश्विक उथल-पुथल का सीधा परिणाम मानी जा रही है।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल भंडार में आई इस कमी की मुख्य वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets – FCA) में गिरावट है। एफसीए, जो विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, इस दौरान 7.62 अरब डॉलर घटकर 551.99 अरब डॉलर रह गया। गौरतलब है कि एफसीए में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य वैश्विक मुद्राएं भी शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं के मूल्य में आए उतार-चढ़ाव ने भारत के कुल रिजर्व पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
केवल विदेशी मुद्रा ही नहीं, बल्कि भारत के सोने के भंडार (Gold Reserve) के मूल्य में भी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, सोने के भंडार का मूल्य 2.06 अरब डॉलर घटकर 111.26 अरब डॉलर रह गया। इसके साथ ही, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 2.5 करोड़ डॉलर की कमी आई और यह 18.78 अरब डॉलर पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के आरक्षित कोष में भी 10.5 करोड़ डॉलर की गिरावट देखी गई है, जो अब घटकर 4.77 अरब डॉलर रह गया है।
भारत के आर्थिक आंकड़ों में आई यह गिरावट वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक और आर्थिक तनाव का प्रतिबिंब है। एक ओर अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां (Protectionist Policies) व्यापारिक बाधाएं उत्पन्न कर रही हैं, तो दूसरी ओर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। हालांकि, 686 अरब डॉलर का भंडार अभी भी भारत को किसी भी बड़े संकट से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है, लेकिन आने वाले समय में आरबीआई और सरकार को इन चुनौतियों से निपटने के लिए और अधिक सतर्कता बरतनी होगी।
Read More: Flying Snake Mystery: प्रकृति का अद्भुत रहस्य, बिना पंखों के हवा में उड़ता है यह सांप
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का आगाज 28 मार्च से होने जा रहा…
Ambikapur News : सरगुजा जिले में नकली सोने के बिस्किट के जरिए लाखों की ठगी…
Elvish Yadav Snake Venom Case: मशहूर यूट्यूबर और 'बिग बॉस ओटीटी' विजेता एल्विश यादव के…
US Security Alert: अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में उस समय हड़कंप मच गया जब…
US National Debt: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद अमेरिका इस समय एक…
Kerala Election 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी…
This website uses cookies.