US Iran Deal: पश्चिमी एशिया और खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से जारी गंभीर तनाव और युद्ध की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता होने जा रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को पश्चिमी देशों के एक उच्च पदस्थ सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार, इस युद्ध को रोकने के लिए आगामी रविवार तक दोनों देशों के बीच एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस ऐतिहासिक कूटनीतिक बैठक और हस्ताक्षर समारोह के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर को सबसे संभावित और उपयुक्त स्थान माना जा रहा है। वर्तमान समय में इस शांति समझौते की विभिन्न शर्तों और मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों के बीच गहन चर्चा चल रही है।

जेडी वेंस और मोहम्मद बाकर कलीबाफ करेंगे हस्ताक्षर
राजनैतिक रणनीतिकारों का मुख्य लक्ष्य इस समझौते के अंतिम मसौदे को शनिवार तक पूरी तरह से तैयार कर लेना है, ताकि तय समय के अनुसार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ इस पर अपने हस्ताक्षर कर सकें। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी निश्चित स्थान की घोषणा नहीं की गई है, परंतु जिनेवा का नाम ही सबसे आगे चल रहा है। इस वार्ता के बीच ईरान इस बात पर मजबूती से अड़ा हुआ है कि इस समझौते में लेबनान के भीतर चल रही सैन्य कार्रवाई को तुरंत समाप्त करने की शर्त को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जहां इजरायली सेना लगातार ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह मिलिशिया के खिलाफ युद्ध लड़ रही है।

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना अब ईरान पर किसी भी प्रकार के नए सैन्य हमले नहीं करेगी, क्योंकि दोनों देशों के बीच का यह महत्वपूर्ण समझौता अब पूरी तरह से तैयार हो चुका है। ट्रंप ने पत्रकारों के सामने गर्व से दावा करते हुए कहा कि हमने खाड़ी क्षेत्र में संभावित बड़े युद्ध को टालने के लिए ईरान के साथ मिलकर एक अत्यंत शानदार समझौता कर लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस रुख से स्पष्ट है कि अमेरिका भी इस क्षेत्र में फिलहाल सैन्य टकराव को और अधिक बढ़ाने के मूड में नहीं है।
ईरान की शर्तों के सामने झुका अमेरिका
शुक्रवार को ईरानी अधिकारियों द्वारा साझा की गई समझौते की प्रारंभिक शर्तों को देखा जाए, तो ऐसा प्रतीत होता है कि तेहरान अपनी अधिकांश प्रमुख मांगों को मनवाने में पूरी तरह सफल रहा है। इसके विपरीत, इस सौदे में राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकताओं को बहुत कम स्थान मिलता दिख रहा है। ट्रंप को इस समझौते से जो एकमात्र बड़ी राहत मिलती दिख रही है, वह है होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का फिर से खुलना। ज्ञात हो कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को ईरान ने फरवरी महीने में ट्रंप द्वारा दिए गए सैन्य हमले के आदेश के बाद पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी।
आर्थिक पाबंदियां हटाने और तीन सौ अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज की उठी मांग
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस शांति समझौते के मसौदे के तहत ईरान के कच्चे तेल के निर्यात पर लगी तमाम अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां पूरी तरह से हटा ली जाएंगी और विदेशी बैंकों में फ्रीज किए गए उसके अरबों डॉलर के फंड को भी तुरंत अनफ्रीज़ किया जाएगा। इसके अलावा, लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होगा। न्यूक्लियर वेपन्स के संवेदनशील मुद्दे पर दोनों देश बाद में अलग से चर्चा करेंगे। वहीं, ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इन शर्तों में अमेरिका द्वारा अपनी सेना को ईरान की सीमाओं के पास से पूरी तरह हटाने और बर्बाद हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज की योजनाएं पेश करने की मांग भी शामिल है।
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