US Iran Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच हालिया 14-सूत्रीय समझौता (MoU) भी दोनों देशों के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने वाशिंगटन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समझौते की शर्तों का अक्षरशः पालन नहीं किया गया, तो ईरान सैन्य टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है। गालिबाफ का मानना है कि अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं को हर हाल में पूरा करना होगा, अन्यथा किसी भी प्रकार की अंतिम वार्ता निरर्थक है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका अपने वादों पर खरा नहीं उतरता, तब तक समझौते को लेकर आगे बढ़ने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
‘बातचीत भी संघर्ष का एक तरीका है’
स्विट्जरलैंड के बुर्गनस्टॉक में हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद घरेलू आलोचनाओं का सामना कर रहे गालिबाफ ने ईरान के आलोचकों को करारा जवाब दिया है। लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिका से संवाद को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि बातचीत का अर्थ मित्रता कतई नहीं है। उन्होंने अमेरिका को ‘शातिर दुश्मन’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि बातचीत संघर्ष करने का ही एक कूटनीतिक तरीका है। ईरान का यह रुख बताता है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के नरम व्यवहार के मूड में नहीं है और उसे केवल एक रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में ही देखता है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान का सख्त दावा
ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर अपनी संप्रभुता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। गालिबाफ ने घोषणा की कि इस जलमार्ग पर केवल ईरान और ओमान का अधिकार है। समझौते के तहत, केवल पहले 60 दिनों तक जहाजों को मुक्त आवाजाही की छूट दी जाएगी, जिसके बाद ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स वसूलना शुरू करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान का क्षेत्रीय जल क्षेत्र है और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वे किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं।
बुर्गनस्टॉक और दोहा वार्ताओं की वास्तविकता
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ फिलहाल कोई अंतिम रणनीतिक डील नहीं हो रही है। बुर्गनस्टॉक में हुई वार्ता का मुख्य एजेंडा 14-सूत्रीय MoU के पहले चरण को लागू करना है, जिसमें लेबनान की संप्रभुता और सीमाओं की स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। वहीं, दोहा में चल रही वार्ता पूरी तरह से तकनीकी है, जिसका उद्देश्य ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों की बहाली और बैंकिंग शर्तों को सुलझाना है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में अमेरिका के साथ किसी भी उच्च-स्तरीय राजनीतिक बैठक की कोई योजना नहीं है।
आर्थिक मोर्चे पर ईरान की कूटनीतिक सफलता
तनाव के बावजूद, गालिबाफ ने स्वीकार किया कि इस समझौते से ईरान को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिले हैं। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटने के बाद, ईरान ने अब तक 4 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल निर्यात किया है, जिसे तेहरान अपनी बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत मान रहा है। हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि फारस की खाड़ी में किसी भी प्रकार का सैन्य उल्लंघन समझौते का उल्लंघन माना जाएगा और इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ईरान का रुख साफ है: यदि दूसरा पक्ष अपने वादों का पालन करता है, तो ईरान भी शांति बनाए रखेगा, अन्यथा किसी भी उकसावे का जवाब सैन्य प्रतिक्रिया से दिया जाएगा।
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