US Iran Relations : स्विट्जरलैंड में चल रही परमाणु वार्ता के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। हालिया दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच परमाणु साइटों के निरीक्षण के मसले पर गहरा मतभेद उभरकर सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को अपनी साइटों की जांच की अनुमति नहीं देता है, तो किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं होगा। ट्रंप का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब ईरान उन दावों को सिरे से खारिज कर रहा है, जिनमें कहा गया था कि उसने अपनी परमाणु सुविधाओं पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए कोई आधिकारिक सहमति जताई है।

ट्रंप ने ईरानी दावों को बताया पूरी तरह से गलत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों द्वारा निरीक्षण तंत्र के दायरे पर उठाए जा रहे सवालों को कड़ाई से नकार दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ईरान को प्रस्तावित समझौते की सभी शर्तों की पूरी जानकारी है और वे जानते हैं कि निरीक्षण अनिवार्य है। उन्होंने ईरानी पक्ष की ओर से हाल ही में जारी उन बयानों को ‘गलत’ करार दिया जिनमें कहा गया था कि परमाणु निरीक्षण के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरा नहीं उतरता है, तो वे तुरंत इन वार्ताओं को रद्द करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की पहुंच ही ‘परमाणु ईमानदारी’ सुनिश्चित करने का एकमात्र रास्ता है।

विवाद का मूल कारण: बमबारी वाली परमाणु साइटों का निरीक्षण
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें बीते साल अमेरिकी बमबारी का शिकार बनी परमाणु साइटों की जांच की बात कही गई थी। बघाई का कहना है कि इन साइटों के निरीक्षण के लिए कोई निश्चित कार्यक्रम या समय-सीमा तय नहीं की गई है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि समझौता पूरी तरह से पारदर्शी है और इसमें बिना किसी शर्त के दीर्घकालिक परमाणु निरीक्षण का प्रावधान शामिल है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।
शांति समझौते के लिए निरीक्षण है अनिवार्य शर्त
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी शांति समझौते की सफलता पूरी तरह से परमाणु निरीक्षण की कठोरता पर निर्भर करेगी। उनका मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के बिना कोई भी समझौता केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। ट्रंप ने कहा कि IAEA के निरीक्षक ‘सही समय पर और सही जगह पर’ मौजूद रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है। अब देखने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और अपनी घरेलू राजनीति के बीच ईरान इस निरीक्षण व्यवस्था को स्वीकार करता है या फिर यह शांति वार्ता एक और असफल प्रयास बनकर समाप्त हो जाती है।











