US-Iran War : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहरा गया है, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा और वहां अमेरिकी हितों से जुड़े जहाजों पर हमलों ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का आरोप है कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है, जिसके जवाब में ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का तत्काल प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। सोमवार, 13 जुलाई को टोक्यो सत्र में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 4 फीसदी उछलकर 79.90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड भी 74.50 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा।

भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां
भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती लेकर आई है। सबसे पहले, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। जब तेल महंगा होता है, तो डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू गिरती है, जिससे आयात और भी खर्चीला हो जाता है। दूसरे, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे प्रमुख ऊर्जा गलियारा है, जहां से भारत अपनी अधिकांश कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करता है। यद्यपि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास किया है, लेकिन इस रूट के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है, जिसका असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर पड़ना तय है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
इस संघर्ष में केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट भी जुड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक तैनात रहते हैं। हमलों के दौरान इन जहाजों को निशाना बनाए जाने से भारतीय नागरिकों के हताहत होने का खतरा बढ़ गया है। हाल ही में ओमान तट के समीप ‘GFS Galaxy’ नामक जहाज पर हुए हमले ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन एक भारतीय अभी भी लापता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिडिल ईस्ट में शांति और सुरक्षित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने की अपील की है।
दावों का अंतर्विरोध और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता
ईरान की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। दूसरी ओर, अमेरिका इन दावों को खारिज करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर जोर दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के अनुसार, जून में युद्धविराम के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार हुआ था और उत्पादन 9.88 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। हालांकि, आईईए ने स्पष्ट किया है कि यह सुधार केवल तभी टिकाऊ है जब होर्मुज स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही सामान्य रहे। हालिया घटनाएं यह दर्शाती हैं कि तेल बाजार की स्थिरता अभी भी मिडिल ईस्ट की नाजुक शांति पर निर्भर है, जो किसी भी क्षण बिगड़ सकती है।
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