US Iran War : अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, इस्लामाबाद समझौता टूटा, कुवैत में बढ़ी तबाही और संकट

US Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब बेहद खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव ने वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह जलमार्ग, जो कभी दुनिया के कुल कच्चे तेल के पांचवें हिस्से का परिवहन करता था, अब मिसाइलों और ड्रोन हमलों का अखाड़ा बन चुका है। ‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ ने जानकारी दी है कि ईरान की सैन्य क्षमता को नेस्तनाबूद करने के लिए उन्होंने लगातार सातवीं रात भीषण हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के हथियार भंडार, निगरानी केंद्रों और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

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तेहरान ने तोड़ा अंतरिम समझौता, कूटनीति की उम्मीदें खत्म

ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निलंबित कर दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके जवाब में ईरान अब किसी भी शर्त का पालन नहीं करेगा। इस निर्णय ने दोनों देशों के बीच बची-कुची कूटनीतिक बातचीत के दरवाजों को भी बंद कर दिया है। युद्ध के अंत का फिलहाल कोई संकेत नजर नहीं आ रहा है, जिससे मध्य-पूर्व में अस्थिरता और गहरा गई है।

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कुवैत पर ईरानी हमलों से मानवीय संकट और मची तबाही

संघर्ष का असर अब कुवैत तक फैल गया है, जहां ईरान ने समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्रों और तेल प्रतिष्ठानों पर घातक हमले किए हैं। इन हमलों में न केवल कई लोग घायल हुए हैं, बल्कि बिजली उत्पादन की इकाइयों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कुवैत, जो अपनी 90 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति के लिए समुद्री जल को मीठा बनाने पर निर्भर है, अब गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है। मिसाइल हमलों के खतरे के चलते कुवैत को अपना हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा है और हवाई उड़ानों का संचालन भी बाधित हुआ है, जिससे आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

युद्ध का खूनी मंजर: मौत और चोटों का बढ़ता आंकड़ा

दोनों ओर से हो रहे हमलों में भारी जनहानि हुई है। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों में अब तक 50 से अधिक नागरिकों की मौत हुई है और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी स्वीकार किया है कि इस युद्ध में अब तक उनके 14 सैनिकों की जान जा चुकी है और 400 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं। हमलों ने ईरान के आधारभूत ढांचे, जैसे कि बिजली संयंत्रों, पुलों और सुरंगों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे बंदर अब्बास जैसे महत्वपूर्ण शहरों में आवाजाही और जनजीवन पूरी तरह ठप पड़ गया है।

वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल और ट्रंप की चेतावनी

इस युद्ध का सीधा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, क्योंकि होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तीन सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ ढीली करने के लिए वे किसी भी हद तक जाएंगे। अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात को पूरी तरह रोकने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी भी लागू कर दी है। ईरान का दावा है कि इस जलमार्ग पर उसका अधिकार है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे खुला जलमार्ग मानता है, जिससे यह विवाद और भी जटिल हो गया है।

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Chandan Das

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