US Iran war threat
US Iran war threat: ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों और सरकार की दमनकारी नीति के बीच मध्य-पूर्व से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और नेक्सटा टीवी के दावों के अनुसार, अमेरिका अगले 24 घंटों के भीतर ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। यह तनावपूर्ण स्थिति तब पैदा हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के आंतरिक हालातों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुका है। आर्थिक पतन, मुद्रा के गिरते मूल्य और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ उठ रही आवाजों को कुचलने के लिए ईरानी सरकार बल प्रयोग कर रही है। खबरों के मुताबिक, अब तक इन प्रदर्शनों में 2,600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा की है कि “मदद रास्ते में है”। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना जारी रखता है, तो अमेरिका बेहद सख्त सैन्य कार्रवाई करेगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने हमले के कई विकल्प पेश किए हैं। इन विकल्पों में ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल भंडारों और सुरक्षा तंत्र के प्रमुख केंद्रों को निशाना बनाना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो यह ईरान की सैन्य क्षमताओं को पंगु बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा। ट्रंप ने न केवल सैन्य कार्रवाई बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को घेरने की योजना बनाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।
अमेरिकी हमले की आहट के बीच तेहरान ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और तुर्की सहित अपने पड़ोसी देशों को चेतावनी जारी की है कि यदि उनकी धरती का उपयोग अमेरिकी हमले के लिए किया गया, तो उन देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को तबाह कर दिया जाएगा। वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस स्थिति के लिए वाशिंगटन को जिम्मेदार मानते हैं और क्षेत्रीय शांति भंग होने की स्थिति में पड़ोसी देश भी इसके परिणामों से नहीं बच पाएंगे।
युद्ध की आशंका को देखते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सुरक्षात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कतर स्थित ‘अल उदेद एयर बेस’ से कुछ महत्वपूर्ण कर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। दूसरी ओर, ब्रिटेन ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने सैनिकों की निकासी प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजनयिक गलियारों में इस संभावित हमले को लेकर भारी बेचैनी है, क्योंकि यह न केवल ईरान बल्कि पूरे वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
वर्तमान में पूरी दुनिया की नजरें अगले 24 घंटों पर टिकी हैं। क्या ट्रंप अपनी मौखिक चेतावनियों को धरातल पर उतारते हुए सैन्य कार्रवाई का आदेश देंगे, या यह केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की एक रणनीति है? ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था और भारी जनहानि के बीच यह सैन्य तनाव क्षेत्र को एक विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल सकता है।
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