US Mexico Water Treaty
US Mexico Water Treaty: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के बीच एक युगांतकारी समझौता हुआ है, जिसने दशकों पुराने जल विवाद पर विराम लगा दिया है। इस नए समझौते के तहत मेक्सिको अब हर साल अमेरिका को पानी की एक निश्चित और अनिवार्य मात्रा की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। यह समझौता केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तरी अमेरिका के दो सबसे बड़े पड़ोसियों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति संतुलन की एक नई इबारत लिखता है। वर्षों से अनिश्चितता के भंवर में फंसा यह मुद्दा अब एक ठोस कार्ययोजना के रूप में सामने आया है।
इस समझौते के पीछे राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त ‘टैरिफ चेतावनी’ को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि मेक्सिको जल संधि की शर्तों का पालन नहीं करता और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती, तो मेक्सिको से आने वाले सभी सामानों पर 5 प्रतिशत तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगा दिया जाएगा। मेक्सिको की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर अमेरिकी निर्यात पर निर्भर है, ऐसे में इस आर्थिक प्रहार की आशंका ने मेक्सिको सरकार को तुरंत सक्रिय कर दिया। दबाव की इसी रणनीति के चलते राष्ट्रपति शीनबाम वार्षिक जल आपूर्ति के लिए सहमत हुईं।
नए समझौते के प्रावधानों के अनुसार, मेक्सिको को अब अपने पांच साल के जल चक्र के दौरान हर साल कम से कम 3.5 लाख एकड़-फुट पानी अमेरिका को भेजना होगा। इससे पहले, 1944 की पुरानी संधि के तहत मेक्सिको पांच साल की अवधि के अंत में अपना कोटा पूरा करता था, जिससे शुरुआती वर्षों में भारी अनिश्चितता बनी रहती थी। अब वार्षिक आपूर्ति को अनिवार्य बनाकर अमेरिका ने यह सुनिश्चित किया है कि उसके सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर टेक्सास के किसानों को साल भर सिंचाई के लिए पानी मिलता रहे।
पुरानी व्यवस्था के तहत मेक्सिको को पांच वर्षों में कुल 17.5 लाख एकड़-फुट पानी देना होता था। अमेरिका का लंबे समय से यह आरोप था कि मेक्सिको शुरुआती चार सालों में पानी की कटौती करता था और केवल पांचवें साल में अपना कोटा पूरा करता था। इस अनियमितता के कारण टेक्सास के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। समय पर पानी न मिलने से हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो जाती थीं। नया समझौता इन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब उन्हें अपनी फसलों के लिए जल आपूर्ति का एक निश्चित कैलेंडर प्राप्त होगा।
भले ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह समझौता हो गया है, लेकिन मेक्सिको के भीतर इसका विरोध शुरू हो गया है। मेक्सिको के उत्तरी राज्य, जैसे तामाउलिपास, वर्तमान में स्वयं गंभीर सूखे की चपेट में हैं। वहां के स्थानीय किसानों का कहना है कि जब उनके पास अपनी फसलों के लिए पानी नहीं है, तो अमेरिका को पानी देना उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। मेक्सिको की राष्ट्रपति शीनबाम के लिए अपने घरेलू किसानों के हितों और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को संतुलित करना एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगी।
यह समझौता पिछले सप्ताह ट्रंप और शीनबाम के बीच हुई फोन वार्ता का सुखद परिणाम है। इसने साबित कर दिया है कि जल प्रबंधन अब केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इस कदम से न केवल जल आपूर्ति में स्थिरता आएगी, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में भी नया विश्वास पैदा होगा। अमेरिका इसे अपनी एक बड़ी आर्थिक जीत मान रहा है, जो भविष्य में ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत अन्य समझौतों के लिए एक आधार तैयार करेगा।
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