US Midterm Elections 2026: अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections 2026) के बाद अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। इन चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। मंगलवार को लाखों मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। शुरुआती एग्जिट पोल और चुनावी विश्लेषण में प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति पर खास नजर रखी जा रही है, जबकि सीनेट में मुकाबला कड़ा बना हुआ है। चुनाव अधिकारियों की ओर से मतगणना जारी रहने के कारण अंतिम नतीजे आने में समय लग सकता है।
कांग्रेस पर नियंत्रण के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में मुकाबला
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं और इनके जरिए कांग्रेस में राजनीतिक संतुलन तय होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अधिकांश मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी ने कांग्रेस में अपनी सीटें गंवाई हैं। ऐसे में रिपब्लिकन पार्टी के सामने इस बार भी अपनी संसदीय स्थिति बनाए रखने की चुनौती है। हालांकि, अंतिम तस्वीर मतगणना और अलग-अलग राज्यों के आधिकारिक परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग और महंगाई बनी चुनावी मुद्दा
इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता और उनकी नीतियां प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। ईरान के साथ युद्ध, ईंधन की बढ़ती कीमतें और महंगाई ने अमेरिकी मतदाताओं की आर्थिक चिंताओं को बढ़ाया है। शुरुआती एग्जिट पोल के मुताबिक, करीब आधे मतदाताओं ने चुनाव को ट्रंप के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करने के अवसर के रूप में देखा। वहीं लगभग तीन-चौथाई मतदाताओं ने देश की मौजूदा दिशा पर असंतोष जताया। करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं का मानना है कि कांग्रेस को राष्ट्रपति की शक्तियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण रखना चाहिए।

ट्रंप ने अपने समर्थकों से की थी खास अपील
मध्यावधि चुनाव को अक्सर मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय के रूप में देखा जाता है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे मतदान ऐसे करें, जैसे राष्ट्रपति स्वयं चुनाव मैदान में हों। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी ट्रंप की नीतियों और उनके कार्यकाल को अपने चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया। इस तरह चुनाव में कांग्रेस की सीटों के साथ राष्ट्रपति के नेतृत्व और नीतियों पर भी मतदाताओं की प्रतिक्रिया सामने आई।
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव
अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान कराया गया। वहीं, ऊपरी सदन सीनेट की कुल 100 सीटों में से 35 सीटों के लिए चुनाव हुआ। दिए गए चुनावी गणित के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन पार्टी से कम से कम तीन सीटों का फायदा चाहिए था। सीनेट में नियंत्रण हासिल करने के लिए उन्हें चार सीटों का शुद्ध लाभ जरूरी था।

हाउस की 47 सीटों पर मुकाबला, सीनेट में चुनौती
रॉयटर्स के चुनावी विश्लेषण के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा की 47 सीटों पर कड़ा मुकाबला माना गया। विश्लेषण में बताया गया कि यदि अन्य सीटों पर अनुमान के मुताबिक परिणाम आते हैं तो डेमोक्रेट्स को बहुमत के लिए इन प्रतिस्पर्धी सीटों में से 13 जीतने की जरूरत होगी। सीनेट में उनकी चुनौती अलग थी। उन्हें अपनी मौजूदा सीटें बचाने के साथ अलास्का, आयोवा, कंसास, नेब्रास्का, ओहायो, साउथ कैरोलिना और टेक्सास जैसे राज्यों में भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों को चुनौती देनी थी।
चुनावी नतीजों को चुनौती देने की आशंका
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी अमेरिकी चुनावों में धांधली के आरोप लगाते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में कानूनी विशेषज्ञों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने आशंका जताई कि रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ परिणाम आने पर चुनावी नतीजों को चुनौती दी जा सकती है। हालांकि, किसी चुनौती की संभावना को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
50 राज्यों में तैनात किए गए चुनाव पर्यवेक्षक
अमेरिकी न्याय विभाग ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए सभी 50 राज्यों में करीब 1,000 पर्यवेक्षक और मॉनिटर तैनात किए। विभाग ने इसे चुनाव दिवस पर निगरानी का बड़ा अभियान बताया। वहीं डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस कदम की आलोचना करते हुए आशंका जताई कि इससे मतदाताओं में डर का माहौल बन सकता है। अब मतगणना और आधिकारिक परिणाम तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन किस दिशा में जाता है।
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