Assam Polygamy News : असम में सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया है कि राज्य सरकार के किसी कर्मचारी के बहुविवाह में शामिल पाए जाने पर उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसे कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है। इसके साथ ही भविष्य में सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए भी उसे अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है।
सभी धर्मों के कर्मचारियों पर लागू होगा नियम
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि यह फैसला किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा। असम सरकार के कर्मचारी यदि बहुविवाह के दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होगी। सरकार का कहना है कि सेवा नियमों में किए गए बदलाव का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर स्पष्ट और सख्त व्यवस्था लागू करना है।

असम सर्विस और डिसिप्लिन नियमों में संशोधन
सीएम सरमा के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने असम सर्विस और डिसिप्लिन नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत नियम सात की धारा छह में नया प्रावधान जोड़ा गया है। इस बदलाव के माध्यम से बहुविवाह के मामले में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के लिए बर्खास्तगी और भविष्य में सरकारी रोजगार से अयोग्यता जैसी सजा का रास्ता तैयार किया गया है।

दोषी पाए जाने पर भविष्य की सरकारी नौकरी का रास्ता भी बंद
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल मौजूदा नौकरी तक सीमित नहीं रहेगी। बहुविवाह का दोषी पाया गया कर्मचारी भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए भी अयोग्य हो सकता है। सरकार का यह कदम सरकारी सेवा में अनुशासन और निर्धारित आचरण नियमों को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया फैसला बताया जा रहा है। हालांकि, किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी।
शिवसागर और चराईदेव की बाढ़ की जांच भी होगी
असम सरकार ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी कदम उठाने का फैसला किया है। इस साल शिवसागर और चराईदेव जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के कारणों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार यह पता लगाना चाहती है कि इन जिलों में बाढ़ इतनी गंभीर क्यों हुई और इसके पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार थे।

केंद्र सरकार को दस दिनों के भीतर भेजा जाएगा पत्र
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि इस मामले में केंद्र सरकार को अगले दस दिनों के भीतर पत्र भेजा जाएगा। राज्य सरकार की ओर से सीबीआई जांच का अनुरोध किया जाएगा। हालांकि, जांच एजेंसी को मामला सौंपने का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बाढ़ के वास्तविक कारणों का पता लगाना है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
बाढ़ से हुए नुकसान के बाद जांच पर जोर
शिवसागर और चराईदेव में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था। इस घटना के बाद राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ के कारणों को लेकर भी सवाल उठे। अब राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि केंद्र से मंजूरी मिलती है, तो सीबीआई बाढ़ की परिस्थितियों और संभावित कारणों की जांच कर सकती है।
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