Vegetable Farming
Vegetable Farming : भीषण गर्मी का मौसम जहां एक ओर आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देता है, वहीं दूसरी ओर यह प्रगतिशील किसानों के लिए मोटी कमाई का अवसर भी लेकर आता है। जब चिलचिलाती धूप में पारंपरिक फसलें दम तोड़ने लगती हैं, तब खीरा, ककड़ी और लौकी जैसी बेल वाली सब्जियां ‘गर्मियों के जैकपॉट’ के रूप में उभरती हैं। ये फसलें न केवल कम समय में तैयार होती हैं, बल्कि कम निवेश में बंपर मुनाफे की गारंटी भी देती हैं। आजकल के युवा किसान इन फसलों को एक शानदार बिजनेस मॉडल के रूप में अपना रहे हैं।
गर्मियों के इस ‘शॉर्ट-टर्म’ खेती मॉडल में खीरा और ककड़ी सबसे भरोसेमंद विकल्प माने जाते हैं। इन फसलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये बुवाई के मात्र 40 से 50 दिनों के भीतर ही फल देना शुरू कर देती हैं। इन्हें बहुत ज्यादा खाद या महंगे कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती। खीरे की कुछ आधुनिक किस्में तो इतनी तेज हैं कि 40 दिन पूरे होते-होते आपकी फसल मंडी पहुंचने के लिए तैयार हो जाती है। इसी तरह, लौकी और तोरई भी गर्मी के अनुकूल होती हैं और एक बार फल देना शुरू करने के बाद लगातार कई महीनों तक उत्पादन देती रहती हैं।
गर्मियों के दौरान शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए लोग ऐसी सब्जियों का अधिक सेवन करते हैं जिनमें जल की मात्रा भरपूर हो। यही कारण है कि मंडियों में खीरा, ककड़ी और लौकी की मांग हमेशा चरम पर रहती है। चूंकि इन सब्जियों की खपत कभी कम नहीं होती, इसलिए किसानों को अपना माल बेचने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता। मंडियों के साथ-साथ जूस की दुकानों और शादियों के सीजन में इन सब्जियों की थोक डिमांड रहती है, जिससे किसानों को बहुत ही आकर्षक दाम मिल जाते हैं।
मुनाफा कमाने के लिए केवल बीज डाल देना पर्याप्त नहीं है, इसके लिए सही तकनीक का होना भी अनिवार्य है। गर्मियों की सब्जियों के लिए ऐसी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जल निकासी (Drainage) की अच्छी व्यवस्था हो।
खेत की तैयारी: बुवाई से पहले खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए।
खाद का प्रयोग: मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में गोबर की पुरानी खाद या वर्मी कंपोस्ट का छिड़काव करें।
बेड पद्धति: बीजों को सीधे समतल खेत में लगाने के बजाय ‘बेड’ (उठी हुई क्यारियां) बनाकर लगाना चाहिए। इससे सिंचाई में आसानी होती है और पौधों की जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं।
गर्मियों में खेती की सबसे बड़ी चुनौती मिट्टी की नमी को बरकरार रखना है। इसके लिए ‘मल्चिंग’ (Mulching) तकनीक एक वरदान साबित हो सकती है। प्लास्टिक मल्चिंग या सूखी घास से जमीन को ढकने पर सूरज की किरणें सीधे मिट्टी पर नहीं पड़तीं, जिससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है। यह तकनीक न केवल सिंचाई के पानी को बचाती है, बल्कि खरपतवार (Weeds) को उगने से भी रोकती है, जिससे पौधों को सारा पोषण प्राप्त होता है।
अगर आप बाजार में मौजूद अन्य किसानों से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो ‘अगेती खेती’ (Early Farming) का सहारा लें। यदि आपकी फसल बाजार में दूसरों से 10-15 दिन पहले पहुंच जाती है, तो आप शुरुआती ऊंचे दामों का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, यदि आप इन सब्जियों को पूरी तरह जैविक (Organic) तरीके से उगाते हैं और इनकी डायरेक्ट मार्केटिंग करते हैं, तो आपका मुनाफा दोगुना तक बढ़ सकता है। 40 से 50 दिनों का यह छोटा सा निवेश और मेहनत आपको कुछ ही समय में लाखों का रिटर्न देने की क्षमता रखती है।
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