Hormuz Crisis
Hormuz Crisis: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ते सामरिक तनाव और समुद्री व्यापार पर मंडराते खतरों के बीच अमेरिका ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग को सुरक्षित करने के लिए अपने दो सबसे आधुनिक जंगी जहाजों को तैनात किया है। इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य समुद्र के भीतर बिछाई गई उन घातक बारूदी सुरंगों को हटाना है, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा तैनात किया गया है। यह कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित होने से बचाने के लिए की जा रही है।
अमेरिका ने इस संवेदनशील मिशन के लिए अपने नौसैनिक बेड़े से दो गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर—यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी—को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में उतारा है। ये दोनों जहाज न केवल बारूदी सुरंगों की खोज करेंगे, बल्कि किसी भी संभावित हवाई या जमीनी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। CENTCOM के अनुसार, ये युद्धपोत अरब की खाड़ी में सक्रिय रूप से ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तेल टैंकरों और अन्य व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी डर के सुनिश्चित की जा सके।
समुद्र के भीतर छिपी बारूदी सुरंगों को हटाना एक बेहद जोखिम भरा काम है। ऐसे में अमेरिकी नौसेना सीधे जहाजों को भेजने के बजाय अत्याधुनिक ‘अंडरवाटर अनमैन्ड व्हीकल्स’ (UUVs) का उपयोग कर रही है। इन्हें ‘MK-18’ या ‘Mod 2 Kingfish’ के नाम से जाना जाता है। टॉरपीडो के आकार की ये रोबोटिक मशीनें पानी के भीतर स्वतः चलती हैं और हाई-टेक सोनार तकनीक का उपयोग करके समुद्र की सतह का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार करती हैं। इससे रेत या चट्टानों के बीच छिपे विस्फोटकों की सटीक लोकेशन का पता आसानी से चल जाता है।
सतह के नीचे छिपे खतरों को पहचानने के लिए अमेरिका ने ‘MH-60S’ हेलीकॉप्टरों का दस्ता भी तैनात किया है। ये हेलीकॉप्टर ‘एयरबोर्न लेजर माइन डिटेक्शन सिस्टम’ (ALMDS) से लैस हैं। यह प्रणाली शक्तिशाली लेजर किरणों के माध्यम से समुद्र के पानी को स्कैन करती है, जिससे पानी के ठीक नीचे तैर रही बारूदी सुरंगों की पहचान पलक झपकते ही हो जाती है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुरक्षित है, जिससे अमेरिकी सेना को कम समय में बड़े इलाके को साफ करने में मदद मिल रही है।
एक बार जब बारूदी सुरंग की पहचान हो जाती है, तो उसे नष्ट करने के लिए ‘एयरबोर्न माइन न्यूट्रलाइजेशन सिस्टम’ का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक छोटा रोबोटिक डिवाइस पानी में भेजा जाता है जो सीधे विस्फोटक के पास जाकर चिपक जाता है और रिमोट कंट्रोल के जरिए उसे वहीं नष्ट कर देता है। यूएस एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस मिशन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे व्यापार के लिए एक सुरक्षित रास्ता बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इन विध्वंसक जहाजों में एडवांस्ड इंटरसेप्टर मिसाइलें भी लगी हैं, जो आईआरजीसी की ओर से आने वाले किसी भी जवाबी खतरे को पल भर में खत्म कर सकती हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह संकरा रास्ता है जहाँ से वैश्विक तेल का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। यहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य अवरोध या बारूदी सुरंगों का खतरा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। अमेरिका की यह सक्रियता न केवल ईरान को एक कड़ा संदेश है, बल्कि यह उन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को भी भरोसा दिलाने की कोशिश है जो इस रास्ते से अपने टैंकर गुजारती हैं। अमेरिका का यह मिशन आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने के आसार हैं।
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