Russia Sanctions : रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को करीब साढ़े चार साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। अमेरिका समेत कई देश युद्ध समाप्त कराने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष लगातार जारी है। दोनों देश एक-दूसरे के ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ने रूस के खिलाफ दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

अमेरिकी सीनेट ने प्रतिबंध विधेयक को दी मंजूरी
अमेरिकी सीनेट ने रूस पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून का मकसद रूस की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर करने की कोशिश करना है। सीनेट में विधेयक के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 11 सीनेटरों ने इसका विरोध किया। इस तरह इसे व्यापक द्विदलीय समर्थन हासिल हुआ।

डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स ने मिलकर किया समर्थन
इस विधेयक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिला है। डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के कई सांसदों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और सख्त करने के पक्ष में मतदान किया। अमेरिका में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर दोनों दलों के सांसदों का इस तरह एक साथ आना महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर अमेरिकी संसद में रूस के खिलाफ दबाव बनाए रखने को लेकर व्यापक सहमति मौजूद है।
रूस से कारोबार करने वाले देशों पर भी निशाना
प्रस्तावित प्रतिबंध पैकेज का असर केवल रूस तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधेयक में उन देशों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाने का प्रावधान है, जो रूस से तेल, गैस और दूसरे प्रमुख उत्पादों की खरीद जारी रखते हैं। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करना है, क्योंकि ऊर्जा निर्यात रूसी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत माना जाता है। यदि यह पैकेज आगे लागू होता है तो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों के लिए भी आर्थिक जोखिम बढ़ सकते हैं।
लिंडसे ग्राहम ने लंबे समय तक चलाया अभियान
इस प्रतिबंध पैकेज को आगे बढ़ाने के लिए दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने करीब एक वर्ष तक अभियान चलाया था। उनका उद्देश्य रूस के खिलाफ अमेरिकी नीति को और मजबूत करना तथा राष्ट्रपति पुतिन पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ाना था। लंबे समय से चल रही इस पहल को अब सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। प्रतिबंधों का अंतिम प्रभाव आगे की प्रक्रिया और इनके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा।

जेलेंस्की ने अमेरिकी कैपिटल का किया दौरा
यह घटनाक्रम यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की अमेरिका यात्रा के बीच सामने आया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार के कुछ घंटे बाद अमेरिकी कैपिटल का दौरा किया। इस दौरान जेलेंस्की ने डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के सीनेटरों से मुलाकात की। उन्होंने पिछले सप्ताह सीनेट में रूस के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए हुई शुरुआती प्रक्रियात्मक वोटिंग को भी गैलरी से देखा था।
पुतिन पर बढ़ सकता है अमेरिकी दबाव
सीनेट की मंजूरी को रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी रणनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। नए प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका रूस की आर्थिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ाना चाहता है। साथ ही उन देशों को भी संदेश देने की कोशिश की गई है, जो रूस से ऊर्जा और अन्य उत्पाद खरीदते हैं। हालांकि, युद्ध खत्म करने में यह कदम कितना प्रभावी होगा, इसका पता आने वाले समय में ही चलेगा। फिलहाल सीनेट के इस फैसले ने रूस पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने की दिशा में एक नया अध्याय जरूर खोल दिया है।
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