Uttarakhand Siren Alert : उत्तराखंड के लोगों के लिए भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली से जुड़ी अहम सूचना सामने आई है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सुबह ठीक 11 बजे राज्य में लगाए गए सायरन बजाए जाने और मोबाइल फोन पर परीक्षण अलर्ट भेजे जाने की जानकारी दी गई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, यह किसी वास्तविक भूकंप या आपदा का संकेत नहीं है, बल्कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की नियमित जांच और जनजागरूकता अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य नागरिकों को अलर्ट व्यवस्था से परिचित कराना और तकनीकी तैयारियों की समीक्षा करना है।
हर महीने की 9 तारीख को होगी सिस्टम की टेस्टिंग
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देशों के बाद राज्य में हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन और चेतावनी प्रणाली का परीक्षण करने की योजना बताई गई है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, नियमित परीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सायरन, सेंसर और मोबाइल अलर्ट प्रणाली सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी स्थान पर तकनीकी गड़बड़ी सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
सायरन की आवाज सुनकर घबराने की जरूरत नहीं
आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य लोगों को सायरन की आवाज और चेतावनी के संकेतों से परिचित कराना है। वास्तविक भूकंप की स्थिति में समय पर चेतावनी मिलने से लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने और बचाव के जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि परीक्षण के दौरान सायरन सुनाई देने पर घबराएं नहीं और बिना पुष्टि के किसी तरह की अफवाह न फैलाएं।
भूदेव ऐप पर भी आएगा टेस्ट अलर्ट
सायरन के साथ राज्य सरकार द्वारा विकसित ‘भूदेव’ (BhuDev) मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं को परीक्षण संदेश मिलने की जानकारी दी गई है। इस दौरान फोन पर चेतावनी संदेश, बीप की आवाज और वाइब्रेशन हो सकता है। विभाग के मुताबिक, कुछ उपयोगकर्ताओं को परीक्षण से संबंधित पूर्व सूचना भी भेजी गई थी। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे ऐप का अपडेटेड वर्जन इस्तेमाल करें और आवश्यक लोकेशन अनुमति चालू रखें, ताकि सेवा की सुविधाएं सही ढंग से काम कर सकें।
राज्य में 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी नेटवर्क के तहत फिलहाल 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं। इन उपकरणों का उद्देश्य भूकंपीय गतिविधियों का पता लगाने और चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करना है। राज्य में इस नेटवर्क का विस्तार करने की भी योजना बताई गई है। प्रस्ताव के अनुसार, सेंसर और सायरन की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा, ताकि अधिक क्षेत्रों तक चेतावनी प्रणाली की पहुंच बनाई जा सके।
USDMA और IIT रुड़की के सहयोग से विस्तार की योजना
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के सहयोग से नेटवर्क विस्तार की योजना आगे बढ़ाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, नए सेंसर और सायरन अलग-अलग स्थानों पर लगभग 5 से 10 किलोमीटर की दूरी के अंतराल पर स्थापित करने की तैयारी है। हालांकि, वास्तविक कवरेज और उपकरणों की उपलब्धता स्थान के अनुसार अलग हो सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य आपदा के समय लोगों तक चेतावनी पहुंचाने की क्षमता बेहतर करना है।
प्रशासन की अपील
आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि निर्धारित समय पर सायरन बजने को नियमित परीक्षण समझें। इसे वास्तविक भूकंप की चेतावनी मानकर घबराने या अपुष्ट संदेश साझा करने से बचें। किसी वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशासन और अधिकृत एजेंसियों की सूचनाओं पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित परीक्षण से लोगों में जागरूकता बढ़ाने और चेतावनी प्रणाली की तकनीकी तैयारियों को परखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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