Weight Loss
Weight Loss : मोटापा कम करने की चाहत में आजकल लोग शॉर्टकट अपना रहे हैं, लेकिन यह जल्दबाजी जानलेवा साबित हो सकती है। हाल के वर्षों में वजन घटाने वाली दवाओं, विशेषकर GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट का चलन भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ा है। मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाई गई इन दवाओं का इस्तेमाल अब लोग बिना किसी मेडिकल सुपरविजन के सिर्फ ‘दुबला दिखने’ के लिए कर रहे हैं। इस बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल (DCGI) ने अब इन दवाओं की बिक्री और विज्ञापन पर अपनी निगरानी सख्त कर दी है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉक्टर अशोक सेठ के अनुसार, लोग इन एंटी-डायबिटिक दवाओं का उपयोग केवल कॉस्मेटिक उद्देश्यों और अच्छा दिखने के लिए कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये दवाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे लोग बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के इन्हें खरीद रहे हैं। यह ‘सेल्फ-मेडिकेशन’ का चलन एक गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रहा है, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर और एक डायबिटिक शरीर पर इन दवाओं का असर बिल्कुल अलग होता है।
इन दवाओं का सबसे पहला और सामान्य प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ता है। जब आप बिना जरूरत के इन दवाओं का सेवन करते हैं, तो शरीर की प्राकृतिक मेटाबॉलिक प्रक्रिया बाधित होती है। इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:
लगातार नॉजिया (जी मिचलाना): यह सबसे आम दुष्प्रभाव है जो व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
उल्टी और अपच: शरीर दवा के रसायनों को स्वीकार नहीं कर पाता, जिससे बार-बार उल्टियां हो सकती हैं।
पेट में गैस और डिस्टेंशन: पेट का फूलना और भारीपन महसूस होना एक स्थायी समस्या बन सकती है।
वजन घटाने वाली इन दवाओं के दुष्प्रभाव केवल मामूली पेट दर्द तक सीमित नहीं हैं। इनके अनियंत्रित सेवन से शरीर के आंतरिक अंगों को अपरिवर्तनीय क्षति पहुँच सकती है:
इन दवाओं के कारण इंटेस्टाइनल ऑब्सट्रक्शन (आंतों में रुकावट) की स्थिति पैदा हो सकती है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसके अलावा, पैनक्रियाज में सूजन यानी पैनक्रियाटाइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है, जो बेहद दर्दनाक और घातक हो सकता है।
शोध और विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का लंबे समय तक बिना निगरानी के सेवन करने से गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) की बीमारियां और पथरी होने की संभावना रहती है। सबसे डरावना पहलू यह है कि कुछ मामलों में इन्हें थायरॉइड कैंसर के बढ़ते जोखिम से भी जोड़कर देखा गया है।
इन दवाओं का असर केवल आपके वजन या पाचन पर ही नहीं, बल्कि आपके नर्वस सिस्टम और हृदय पर भी पड़ता है। बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं को लेने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
हाइपरटेंशन: अचानक उच्च रक्तचाप की समस्या।
अनिद्रा और बेचैनी: नींद न आना और हर समय अतिउत्तेजना (Hyper-excitation) महसूस करना।
अनियमित धड़कन: हार्ट बीट का अचानक तेज होना या शरीर में कंपन महसूस होना।
इन दवाओं के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि जैसे ही आप इनका सेवन बंद करते हैं, वजन फिर से तेजी से बढ़ने लगता है। इसे ‘यो-यो इफेक्ट’ कहा जाता है। इसके अलावा, ये दवाएं केवल फैट कम नहीं करतीं, बल्कि शरीर में भारी मात्रा में प्रोटीन लॉस और मसल्स लॉस (मांसपेशियों की हानि) का कारण बनती हैं। इससे व्यक्ति कमजोर दिखने लगता है और उसकी शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
वजन घटाना एक धीमी और प्राकृतिक प्रक्रिया होनी चाहिए। डॉक्टर अशोक सेठ और अन्य विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि संतुलित आहार और व्यायाम का कोई विकल्प नहीं है। यदि दवा की आवश्यकता है भी, तो वह केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की कड़ी निगरानी में ही ली जानी चाहिए।
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