Vande Mataram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मुख्यालय में पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने संगठन की नई टीम के सदस्यों से मुलाकात की और उनके साथ समूह तस्वीर भी खिंचवाई। बैठक को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार, कार्यशैली और जनता के साथ संपर्क को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
संगठन को मजबूत बनाने पर पीएम मोदी का जोर
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक बैठकें पार्टी को मजबूती देने के साथ-साथ जनता से जुड़ाव को और गहरा करने वाले नए विचारों तथा दृष्टिकोणों का माध्यम बनती हैं। प्रधानमंत्री ने नई संगठनात्मक टीम और सहयोगियों के साथ हुई बातचीत को शानदार बताया। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा का संगठन लगातार बदलती राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी कार्यशैली को मजबूत कर रहा है।
वंदे मातरम को लेकर भाजपा ने पारित किया प्रस्ताव
पीएम मोदी की भाजपा मुख्यालय में मौजूदगी उस महत्वपूर्ण बैठक के बाद हुई, जिसमें पार्टी ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक गौरव और सम्मान को लेकर सर्वसम्मति से एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया। भाजपा ने कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें 1937 में कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रगीत के केवल पहले दो छंद गाने की बात कही गई थी। भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक विरासत को सीमित करने वाला निर्णय बताया।
भाजपा ने राष्ट्रगीत को बताया राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक
भाजपा ने अपने प्रस्ताव में कहा कि ‘वंदे मातरम’ महज एक गीत नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और देश की राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पार्टी के मुताबिक, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और एकजुटता की भावना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भाजपा ने कहा कि राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान किया जाना चाहिए।
पूरे छह छंदों के सम्मान की बात
भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह ‘वंदे मातरम’ को केवल दो छंदों तक सीमित किए जाने के फैसले का विरोध करेगी। पार्टी ने राष्ट्रगीत के सभी छह छंदों की विरासत और सम्मान को सुरक्षित रखने की बात कही। प्रस्ताव में भाजपा ने संविधान सभा के 1950 के बयान का उल्लेख किया और 2026 में संसद द्वारा पारित कानून का भी हवाला दिया, जिसमें ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक दर्जा और संरक्षण दिए जाने की बात कही गई है।
राजनीतिक समझौता संविधान से ऊपर नहीं
भाजपा ने अपने प्रस्ताव में तर्क दिया कि वर्ष 1937 में हुआ कोई राजनीतिक समझौता संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रगीत से जुड़े ऐतिहासिक निर्णयों को संवैधानिक व्यवस्था और मौजूदा कानून के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपने पुराने फैसले को दोबारा अपनाकर राष्ट्रगीत की व्यापक ऐतिहासिक भूमिका को सीमित करने की कोशिश कर रही है।
देशभर में जागरूकता अभियान चलाएगी भाजपा
भाजपा ने ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक विरासत को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने का भी फैसला किया है। पार्टी के अनुसार, इस अभियान के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। खास तौर पर युवाओं को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी राष्ट्रगीत के इतिहास, उसके अर्थ और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका को बेहतर तरीके से समझ सके।
युवाओं को इतिहास से जोड़ने की रणनीति
पार्टी का कहना है कि युवा पीढ़ी को ‘वंदे मातरम’ से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी देना जरूरी है। इसके लिए विशेष कार्यक्रम, संवाद और जागरूकता गतिविधियां आयोजित किए जाने की योजना है। भाजपा का उद्देश्य राष्ट्रगीत को लेकर लोगों के बीच ऐतिहासिक जानकारी और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है। पार्टी ने इसे आने वाली पीढ़ियों को देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का माध्यम भी बताया।
महात्मा गांधी के बयान का भी किया जिक्र
भाजपा ने अपने प्रस्ताव में महात्मा गांधी के उस कथन का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को साम्राज्यवाद विरोधी भावना और पवित्र राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताया था। पार्टी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में इस गीत का व्यापक प्रभाव रहा और इसने लोगों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। इस प्रस्ताव के बाद राष्ट्रगीत को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
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