CG High Court : छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका की आत्महत्या से जुड़े मामले में पुलिस की कार्रवाई अब हाईकोर्ट की निगरानी के दायरे में आ गई है। मामले में पुलिस की ओर से आरोपितों को फरार घोषित करने और उनकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किए जाने को लेकर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन कोरिया पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
मार्ट में चोरी का आरोप लगाने का मामला
मामला सात जुलाई का बताया जा रहा है। आरोप है कि 17 वर्षीय किशोरी अपनी 14 वर्षीय रिश्तेदार बहन के साथ बैकुंठपुर स्थित आईसी मार्ट में खरीदारी करने पहुंची थी। वहां मार्ट संचालक और कर्मचारियों ने दोनों पर चोरी करने का आरोप लगाया। आरोप है कि नाबालिग पर कोरे कागज पर सामान की सूची लिखने और चोरी की स्वीकारोक्ति करने के लिए दबाव बनाया गया। इसी दौरान उसकी स्कूटी भी मार्ट संचालक द्वारा अपने पास रखे जाने की बात सामने आई है।
अगले दिन नाबालिग ने उठाया आत्मघाती कदम
घटना के अगले दिन यानी आठ जुलाई को नाबालिग ने कथित प्रताड़ना का जिक्र करते हुए सुसाइड नोट लिखा और आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपितों दीपक, विनोद और जगत वैद के खिलाफ अपराध दर्ज किया। बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका लंबित है।
आरोपितों को फरार बताने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
मामले में नया मोड़ तब आया जब कोरिया पुलिस की वेबसाइट और आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में आरोपितों को फरार बताया गया। पुलिस की ओर से उनकी गिरफ्तारी के लिए पहले 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर पुलिस से कई सवाल पूछे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति से पहले क्या हुई थी जांच?
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने पुलिस से पूछा कि आरोपितों को फरार घोषित करने से पहले क्या पर्याप्त सामग्री और साक्ष्य जुटाए गए थे। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि 10 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति से पहले संबंधित तथ्यों का विधिवत सत्यापन किया गया था या नहीं। कोर्ट ने विशेष रूप से पूछा कि क्या इस कार्रवाई के संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय से भी सत्यापन कराया गया था।
जमानत लंबित होने के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट में लंबित थी। इसके बावजूद पुलिस की वेबसाइट पर उन्हें फरार बताते हुए गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया गया। अदालत ने इसी बिंदु पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि ऐसी सार्वजनिक घोषणा करने से पहले पुलिस ने किन दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया था।
जांच की निष्पक्षता को लेकर भी निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले की जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कहा है कि पीड़िता के पिता और चाचा को जांच प्रक्रिया से दूर रखा जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोनों के जांच में शामिल होने की बात सामने आती है, तो इस पहलू को गंभीरता से देखा जाएगा।
अगली सुनवाई आठ सितंबर को होगी
मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर को निर्धारित की गई है। उस दौरान तत्कालीन कोरिया एसपी रवि कुमार कुर्रे को अदालत के समक्ष अपना स्पष्टीकरण देना होगा। इसके साथ ही मामले से जुड़े सीसीटीवी डीवीआर की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जाएगी। हाईकोर्ट अब यह देखेगा कि पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं।
पुलिस कार्रवाई पर बढ़ी अदालत की निगरानी
नाबालिग की आत्महत्या से जुड़े इस मामले में अब केवल आरोपितों की भूमिका ही नहीं, बल्कि पुलिस की जांच और कार्रवाई भी न्यायिक जांच के केंद्र में है। आरोपितों को फरार घोषित करने, इनाम की घोषणा करने और लंबित जमानत प्रक्रिया के दौरान पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों पर अदालत के सवालों के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। आगामी सुनवाई में पुलिस के जवाब और तकनीकी साक्ष्यों से आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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