VB-G RAM G Bill 2025
VB-G RAM G Bill 2025: संसद के जारी शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार द्वारा ‘मनरेगा’ (MGNREGA) के स्थान पर ‘VB-G RAM G’ बिल 2025 लाने के फैसले ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। सरकार ने इस नए विधेयक को पहले लोकसभा और उसके बाद राज्यसभा में पेश किया, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इस पर जमकर हंगामा किया। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बदलाव न केवल गरीबों के अधिकारों पर प्रहार है, बल्कि सरकार की मंशा इस महत्वपूर्ण योजना के मूल ढांचे को ही ध्वस्त करने की है। सदन के भीतर और बाहर इस बिल को लेकर तीखी बहस जारी है।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इस योजना से ‘गांधी’ का नाम हटाया है। खरगे ने तीखे शब्दों में कहा कि ‘VB-G RAM G’ बिल लाकर सरकार देश के गरीबों को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहती है ताकि उन्हें फिर से “गुलामी” की ओर धकेला जा सके। उनके अनुसार, मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि गरीबों का एक संवैधानिक अधिकार और जीवन रेखा है, जिसके साथ छेड़छाड़ करना करोड़ों परिवारों के पेट पर लात मारने जैसा है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा उन लोगों को सम्मान के साथ रोटी खिलाने के लिए शुरू किया गया था जिनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “मनरेगा एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कानून है, इसे हल्के में न लें। अगर आप पुराने कानून को खत्म कर नया बिल थोपने की कोशिश करेंगे, तो देश के गरीब आपको सड़कों पर घूमने नहीं देंगे।” खरगे ने सवाल उठाया कि आखिर गरीबों के अधिकार छीनने के पीछे सरकार का क्या इरादा है? क्या सरकार चाहती है कि गरीब और अधिक लाचार हो जाए?
साल 2021 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए खरगे ने सरकार को भविष्य की तस्वीर दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार को तीन “काले कृषि कानूनों” को भारी विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था, वही हश्र इस नए बिल का भी होगा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष इस कानून का पुरजोर विरोध करेगा। खरगे ने भावुक होते हुए कहा, “हम सड़कों पर उतरेंगे और जरूरत पड़ी तो गोलियों का भी सामना करेंगे, लेकिन गरीबों के साथ अन्याय करने वाले इस कानून का समर्थन कभी नहीं करेंगे।”
भाजपा की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने एक पुरानी कहावत का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “सरकार को ‘मुंह में राम और बगल में छुरी’ वाली नीति नहीं अपनानी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बाहर से गरीबों के लिए ‘राम-राम’ का जाप करती है, लेकिन भीतर ही भीतर उनकी गर्दन पर वार करने के लिए कानून रूपी चाकू तैयार रखती है। खरगे ने मांग की कि मनरेगा को उसके पुराने और मूल रूप में ही रखा जाए और इसे कमजोर करने के बजाय और अधिक मजबूत बनाया जाए, अन्यथा देश का गरीब तबका पूरी तरह “बर्बाद” हो जाएगा।
भाषण के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बेहद गंभीर स्वर में कहा, “मैं अपनी मां की कसम खाकर कहता हूं, यह कानून गरीबों के लिए घातक है। सरकार वास्तव में गरीबों के कल्याण को नहीं, बल्कि गरीबों को ही खत्म करना चाहती है।” उन्होंने साफ किया कि यदि यह बिल वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन होगा और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार की होगी। फिलहाल, विपक्ष के कड़े रुख को देखते हुए संसद के आगामी सत्रों में और अधिक हंगामे के आसार हैं।
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