VB-G RAM-G Bill
VB-G RAM-G Bill: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार गारंटी की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। ‘विकसित भारत, रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025’ (VB-G RAM-G) अब संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। लोकसभा में पहले ही पास होने के बाद, देर रात राज्यसभा में भी भारी हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बीच इसे ध्वनि मत से मंजूरी दे दी गई। अब इस बिल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास अंतिम हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह आधिकारिक रूप से कानून बन जाएगा और दशकों से चले आ रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्थान लेगा।
इस बिल को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में जबरदस्त गतिरोध देखने को मिला। विपक्ष ने इस बदलाव को महात्मा गांधी का अपमान करार दिया है, क्योंकि नए बिल के नाम से ‘बापू’ का नाम हट जाएगा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने बिल को सेलेक्ट कमेटी या जेपीसी (JPC) के पास भेजने की मांग की थी। विरोध इतना प्रबल था कि सांसदों ने सदन में बिल की कॉपियां फाड़ीं और नारेबाजी की। राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद विपक्षी सांसद आधी रात को संसद परिसर में ही धरने पर बैठ गए। हालांकि, सरकार अपने निर्णय पर अडिग रही और लंबी चर्चा के बाद इसे पारित करा लिया।
VB-G RAM-G बिल ग्रामीण परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों की मजदूरी की गारंटी मिलेगी। यह वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता लाने के उद्देश्य से की गई है। इसके अलावा, बिल की धारा 6 के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की ऐसी अवधि अधिसूचित कर सकती हैं, जो बुवाई और कटाई के ‘पीक सीजन’ के दौरान होगी, ताकि कृषि कार्यों में श्रमिकों की कमी न हो।
बिल की धारा 22 में वित्तीय प्रबंधन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड शेयरिंग का अनुपात 60:40 तय किया गया है। हालांकि, भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों (जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर) और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। इसका अर्थ है कि इन राज्यों में विकास कार्यों का 90% खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की विचारधारा दोहरी है। उन्होंने तर्क दिया कि महात्मा गांधी हमेशा ‘रामराज्य’ की कल्पना करते थे, और यदि इस बिल का नाम ‘विकसित भारत जी राम जी’ (VB-G RAM-G) रखा गया है, तो कांग्रेस को इस पर आपत्ति क्यों है? चौहान ने विश्वास जताया कि यह मिशन केवल नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह समाज के सबसे गरीब और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा, जो ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल देगा।
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