Vedanta power plant accident
Vedanta power plant accident : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ सिंघनतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर हुए इस दर्दनाक हादसे में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक 16 मजदूरों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। बॉयलर की ट्यूब फटने से हुए इस धमाके ने न केवल प्लांट के भीतर तबाही मचाई, बल्कि कई परिवारों के चिराग भी बुझा दिए।
मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे जब मजदूर अपने काम में व्यस्त थे, तभी अचानक बॉयलर की ट्यूब फटने से जोरदार ब्लास्ट हुआ। शुरुआत में 4 मजदूरों के मौके पर ही दम तोड़ने की खबर आई थी, लेकिन समय बीतने के साथ यह संख्या बढ़ती गई। सक्ती एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के अनुसार, इलाज के दौरान गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों ने दम तोड़ दिया, जिससे कुल मृतकों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। फिलहाल 21 मजदूर अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 6 की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। SDRF (State Disaster Response Force) की टीम ने मंगलवार देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घायलों को तत्काल रायगढ़ और आसपास के बड़े अस्पतालों के हायर सेंटर्स में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है।
इस त्रासदी के बाद वेदांता प्रबंधन और सरकार ने पीड़ितों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है:
वेदांता प्रबंधन: मृतक के परिजनों को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक आश्रित को स्थायी नौकरी। घायलों के लिए 15 लाख रुपये और मुफ्त इलाज।
केंद्र व राज्य सरकार: मृतकों के परिजनों को 7 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद।
हादसे पर राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कोरबा के पुराने चिमनी हादसे (जिसमें 40 लोगों की मौत हुई थी) का जिक्र करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सुरक्षा में ऐसी चूक हुई हो। उन्होंने प्रशासन से एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि ब्लास्ट के वक्त वहां करीब 40 से 50 मजदूर काम कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की मौजूदगी और अचानक बॉयलर फटना, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि प्लांट के मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जांच की जाए ताकि यह साफ हो सके कि क्या यह एक तकनीकी खराबी थी या फिर लापरवाही का नतीजा। फिलहाल, सक्ती पुलिस और प्रशासन मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।
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