Pak Afghan Clash: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे सीमाई तनाव ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। मंगलवार रात खैबर पख्तूनख्वा के कुर्रम जिले में पाकिस्तान सुरक्षा बलों और अफगान तालिबान के बीच भीषण झड़पें हुईं। दोनों ओर से भारी गोलीबारी और हथियारों के इस्तेमाल की खबर है, जिसके चलते क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

तालिबान का बड़ा दावा – 7 पाक सैनिक ढेर
अफगान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स और वॉर ग्लोब न्यूज ने दावा किया कि तालिबान बलों ने सीमापार हमलों में पाकिस्तान के 7 सैनिकों को मार गिराया है। वहीं, एक वीडियो फुटेज में तालिबान ड्रोन द्वारा पाक सैन्य अड्डे पर विस्फोट किए जाने का भी दावा किया गया है।

पाकिस्तान का पलटवार – चौकियों को किया ध्वस्त
पाकिस्तानी सरकारी मीडिया PTV News ने अफगान पक्ष पर बिना उकसावे के गोलीबारी का आरोप लगाया। सेना के मुताबिक, पाकिस्तानी जवानों ने पूरी ताकत से जवाब देते हुए तालिबान की कई चौकियों को तबाह कर दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एक तालिबानी टैंक नष्ट कर दिया गया और आतंकी चौकियां छोड़कर भागने को मजबूर हो गए।
पाकिस्तानी सेना हाई अलर्ट पर
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं और किसी भी संभावित हमले का जवाब देने की पूरी तैयारी है।
रक्षा मंत्री की चेतावनी बनी हकीकत?
इस घटना से पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ही चेतावनी दी थी कि इस्लामाबाद और काबुल के बीच जंग छिड़ सकती है। उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान की ओर से बार-बार सीमा उल्लंघन और आतंकी गतिविधियों के चलते पाकिस्तान को सैन्य प्रतिक्रिया के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
TTP गुटों का एकीकरण, चिंता बढ़ी
इस बीच, अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के दो गुटों ने पाकिस्तान के खिलाफ एकजुट होने की घोषणा की है। इनमें एक गुट का नेतृत्व कुर्रम के मुफ्ती अब्दुर रहमान कर रहे हैं और दूसरा तिराह घाटी के शेर खान के नेतृत्व में है। इन दोनों ने TTP के प्रति वफादारी की कसमें खाई हैं, जिससे सीमा सुरक्षा के लिए नया खतरा पैदा हो गया है।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहा तनाव अब खुले संघर्ष की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। सीमाई गोलीबारी, टैंक नष्ट, सैनिकों की मौत और ड्रोन हमले जैसी घटनाएं इस ओर इशारा कर रही हैं कि हालात बेकाबू हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव क्षेत्रीय अशांति का कारण बन सकता है।











