@Thetarget365 : छत्तीसगढ़ राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल कर नया मानक स्थापित किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के कारण आज प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक किसी भी स्कूल में शिक्षक नहीं है। राज्य में एकल शिक्षक विद्यालयों की संख्या में 80 प्रतिशत की कमी आई है।
यह परिवर्तन युक्तिकरण के माध्यम से संभव हुआ है, जिसका उद्देश्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम और नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप राज्य के शैक्षिक संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग, शिक्षकों की युक्तिसंगत तैनाती और विद्यालयों में आवश्यकतानुसार शिक्षकों की तैनाती करना है।
दरअसल, युक्तिकरण से पहले राज्य के 453 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं थे और 5,936 स्कूलों में केवल एक शिक्षक नियुक्त थे। यह समस्या विशेष रूप से सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील जिलों में प्रचलित थी।इस असमानता को दूर करने के लिए राज्य सरकार शिक्षकों के लिए तीन स्तरों पर काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित करती है: जिला, संभाग और राज्य स्तर। परिणामस्वरूप आज राज्य में ऐसा कोई स्कूल नहीं है, जहां शिक्षक न हों तथा सभी हाई स्कूलों में न्यूनतम संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने युक्तियुक्तकरण के माध्यम से स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हमने तय किया है कि अब छत्तीसगढ़ में कोई भी बच्चा बिना शिक्षक के पढ़ाई नहीं करेगा। युक्तिकरण के माध्यम से हम न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम का अनुपालन कर रहे हैं, बल्कि एक मजबूत और समतापूर्ण शिक्षा प्रणाली की नींव भी रख रहे हैं। यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं है, यह शिक्षा में न्याय की बहाली है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि एकल शिक्षक वाले स्कूलों की स्थिति में सुधार लाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और आने वाले महीनों में पदोन्नति और नई नियुक्तियों के माध्यम से इन स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक भेजे जाएंगे।
राज्य सरकार अब उन 1,207 प्राथमिक विद्यालयों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां अभी भी एक शिक्षक हैं। इस मुद्दे के समाधान के लिए, प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्यों की पदोन्नति, नियुक्ति और नियुक्ति प्रक्रिया को प्राथमिकता देने के लिए एक रणनीति विकसित की गई है।
आवश्यकतानुसार शीघ्र ही शिक्षकों की तैनाती की जाएग
बस्तर जिले में 283, बीजापुर में 250, सुकमा में 186, मोहला-मानपुर-चौकी में 124, कोरबा में 89, बलरामपुर में 94, नारायणपुर में 64, धमतरी में 37, सूरजपुर में 47, दंतेवाड़ा में 11 तथा अन्य जिलों में मात्र 22 एकल शिक्षकीय प्राथमिक शालाएं हैं। आवश्यकतानुसार शीघ्र ही इन विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास शिक्षा को समावेशी बनाना और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने के समान अवसर प्रदान करना है। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि युक्तिकरण सिर्फ एक प्रशासनिक कवायद नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक न्याय आधारित शिक्षा सुधार है, जिसके केंद्र में हर बच्चा, हर गांव, हर स्कूल है।
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