Voter List Revision
Voter List Revision 2026: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के अंतर्गत जिला प्रशासन ने ‘नो-मैपिंग’ (कैटेगरी-सी) के दायरे में आने वाले मतदाताओं की पहचान कर उन्हें नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं का सत्यापन करना है जिनके दस्तावेजों या पते की जानकारी निर्वाचन रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं है। रायपुर जिले की सात विधानसभा सीटों पर इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि प्रशासन अब हर एक वोट की शुद्धता की जांच कर रहा है।
निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों में कुल 1,33,053 मतदाताओं को नो-मैपिंग की श्रेणी में रखा गया है। विधानसभा वार स्थिति देखें तो सबसे अधिक प्रभावित रायपुर नगर पश्चिम क्षेत्र है, जहाँ 46,675 मतदाताओं की पहचान की गई है। इसके बाद रायपुर ग्रामीण में 39,835 और रायपुर नगर उत्तर में 17,416 मतदाता इस श्रेणी में हैं। धरसींवा (8,896), रायपुर नगर दक्षिण (12,495), आरंग (3,531) और अभनपुर (4,205) में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं को अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा। इन सभी से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक पहचान पत्र पेश करने का अनुरोध किया गया है।
जिला निर्वाचन अधिकारी के मार्गदर्शन में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) ने जमीनी स्तर पर कार्य शुरू कर दिया है। 30 दिसंबर 2025 तक जिले के 3,570 मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील कराए जा चुके हैं। इस अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन ने 116 अधिकारियों की एक विशेष टीम तैनात की है, जो 3 जनवरी 2026 से जारी नोटिसों पर विधिवत सुनवाई शुरू करेगी। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे लोकतंत्र की मजबूती के लिए निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपने दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराएं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहे।
पूरे राज्य की बात करें तो स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ की मतदाता सूची में भारी बदलाव देखने को मिले हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार, प्रदेश भर में सर्वे के बाद कुल 27,34,817 मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए की गई है। हटाया गया आंकड़ा काफी बड़ा है, जो यह दर्शाता है कि पिछले वर्षों में सूची में कई तकनीकी और भौतिक विसंगतियां मौजूद थीं।
निर्वाचन आयोग ने नाम हटाने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं। सबसे बड़ा कारण ‘शिफ्टिंग’ है; लगभग 19,13,540 मतदाता या तो स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं या अपने पते पर लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए। दूसरा कारण मृत्यु है, जिसके चलते 6,42,234 लोगों के नाम हटाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 1,79,043 ऐसे नाम मिले जो एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे (डुप्लीकेट एंट्री), जिन्हें अब निरस्त कर दिया गया है। आयोग ने कहा है कि जिनका नाम गलती से कटा है, वे नोटिस के जवाब में दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के लिए एक समय-सारणी जारी की है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है, जो 22 जनवरी 2026 तक चलेगी। इसके बाद 14 फरवरी 2026 तक प्राप्त आवेदनों का वेरिफिकेशन और सुनवाई की जाएगी। सभी सुधारों के बाद 21 फरवरी 2026 को प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित की जाएगी। नागरिक अपनी स्थिति ऑनलाइन आयोग की वेबसाइट पर या ऑफलाइन अपने नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास जाकर जांच सकते हैं।
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