WB NEET 2026: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य की 114 श्रेणियों को दिए गए OBC दर्जे और आरक्षण पर पहले लगाया गया रोक संबंधी आदेश अब दोबारा प्रभावी हो गया है। इस फैसले के बाद इन श्रेणियों के तहत मिलने वाले आरक्षण और उससे जुड़े प्रमाणपत्रों को लेकर स्थिति बदल गई है।

सुप्रीम कोर्ट से SLP वापस लेने के बाद बदली स्थिति
दरअसल, इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया, जब पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका यानी SLP को वापस ले लिया। यह याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट के पुराने आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। राज्य सरकार के याचिका वापस लेने के बाद हाईकोर्ट का पहले वाला रोक संबंधी आदेश फिर से प्रभावी हो गया।

114 श्रेणियों के OBC प्रमाणपत्रों पर असर
हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित व्यक्ति के OBC प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित करते हुए इस स्थिति को स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि विवादित 114 श्रेणियों के आधार पर जारी किए गए OBC प्रमाणपत्रों को अब मान्यता नहीं दी जाएगी। इस फैसले का असर उन उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है, जिन्होंने इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर विभिन्न परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रियाओं में OBC श्रेणी का लाभ लिया है।
NEET अभ्यर्थियों को लगा बड़ा झटका
अदालत के इस रुख से NEET अभ्यर्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो सकती है। जिन उम्मीदवारों ने केंद्रीय OBC सूची के तहत खुद को OBC बताते हुए NEET में हिस्सा लिया था और विवादित प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया था, उन्हें अब सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के तौर पर माना जाएगा। इससे उनकी मेरिट, श्रेणी और प्रवेश प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
लंबे समय से अदालत में चल रहा था विवाद
पश्चिम बंगाल में 114 जातियों और श्रेणियों को OBC का दर्जा देने का मामला काफी समय से न्यायिक विवाद में था। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले आरक्षण पर रोक लगाई थी। अदालत ने अपने आदेश में प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं और उचित सर्वेक्षण नहीं किए जाने जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण माना था।

पिछली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
हाईकोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार की ओर से विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने और OBC आरक्षण को जारी रखने की मांग की गई थी। इस याचिका के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी विचाराधीन रहा।
मौजूदा सरकार ने वापस ली याचिका
हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस SLP को वापस लेने का फैसला किया। याचिका वापस लिए जाने के बाद हाईकोर्ट का पूर्व आदेश दोबारा प्रभावी हो गया। इसी वजह से 114 श्रेणियों से जुड़े OBC प्रमाणपत्रों और आरक्षण लाभ को लेकर पहले वाली कानूनी स्थिति बहाल हो गई है।
मेडिकल दाखिले और सरकारी नौकरियों पर असर संभव
हाईकोर्ट के इस फैसले का प्रभाव केवल NEET तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मेडिकल दाखिले के अलावा सरकारी नौकरियों और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में OBC आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे उम्मीदवारों को अब अपनी श्रेणी और प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर नए सिरे से स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है।
हजारों युवाओं के भविष्य पर पड़ सकता है प्रभाव
इस फैसले ने पश्चिम बंगाल में मेडिकल प्रवेश की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के बीच चिंता बढ़ा दी है। जिन युवाओं ने OBC श्रेणी के आधार पर अपनी तैयारी, आवेदन और मेरिट की रणनीति बनाई थी, उनके लिए श्रेणी बदलने से प्रतिस्पर्धा की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
आरक्षण नीति पर फिर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
कलकत्ता हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस फिर तेज होने की संभावना है। एक तरफ आरक्षण की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार पर सवाल हैं, तो दूसरी ओर इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ रहा है, जिन्होंने संबंधित प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया है। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।
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