West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिगुल बज चुका है। निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स की कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया है। साल 2021 में जहाँ मतदान 8 लंबे चरणों में हुआ था, वहीं इस बार पूरी प्रक्रिया को मात्र दो चरणों में समेट दिया गया है। आयोग का तर्क है कि इससे सुरक्षा बलों की तैनाती और चुनावी प्रबंधन में सुगमता होगी। हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दो चरणों का गणित बेहद जटिल है। पहले और दूसरे चरण की सीटों का समीकरण अलग-अलग दलों के लिए अलग-अलग चुनौतियां और अवसर लेकर आया है, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
23 अप्रैल 2026 को होने वाला पहला चरण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सबसे कठिन परीक्षा साबित होने वाला है। आंकड़ों के मुताबिक, 2021 के चुनाव में भाजपा ने राज्य की जिन 77 सीटों पर जीत हासिल की थी, उनमें से 59 सीटें इसी पहले चरण वाले क्षेत्रों के अंतर्गत आती हैं। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय ‘जीत का अंतर’ है। इन 59 सीटों में से 26 सीटें ऐसी थीं, जहाँ भाजपा महज 5% से भी कम वोटों के अंतर से जीती थी। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि इस बार मतदान के रुझान में 2-3% का भी बदलाव आता है, तो भाजपा के हाथ से ये सीटें खिसक सकती हैं। पहले चरण में भाजपा का दबदबा कायम रखना उसकी सत्ता की राह के लिए अनिवार्य है।
29 अप्रैल को होने वाला दूसरा चरण पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। इस चरण की 142 सीटों में से वर्तमान में 123 पर टीएमसी का कब्जा है। ममता बनर्जी की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चुनाव में उन्होंने कई सीटों पर 20% से अधिक के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। दूसरे चरण में नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर सबकी नजरें टिकी होंगी, जो बंगाल की राजनीति के शक्ति केंद्र माने जाते हैं। टीएमसी के लिए दूसरा चरण वह ‘सुरक्षा कवच’ है, जिसे भेद पाना विपक्ष के लिए फिलहाल एक नामुमकिन चुनौती जैसा प्रतीत हो रहा है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति में टीएमसी 223 सीटों के साथ बेहद मजबूत पायदान पर खड़ी है। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल भाजपा की ताकत उपचुनावों और दलबदल के कारण 77 से घटकर 65 रह गई है। भाजपा को सत्ता तक पहुँचने के लिए अपनी मौजूदा सीटों को बचाने के साथ-साथ 83 अतिरिक्त सीटें जीतनी होंगी, जो एक कठिन लक्ष्य है। वहीं, विपक्षी खेमे में बिखराव भी टीएमसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है; जहाँ कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है और वाम मोर्चा अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन की राह तलाश रहा है। टीएमसी ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।
इस बार का चुनाव 28 फरवरी 2026 को जारी की गई नई और अंतिम वोटर लिस्ट के आधार पर होगा। निर्वाचन आयोग ने इस बार शुद्धिकरण अभियान के तहत सूची से 63 लाख से ज्यादा फर्जी या अप्रासंगिक नाम हटा दिए हैं। अब राज्य में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ है, जिनमें 3.6 करोड़ पुरुष और 3.4 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। बंगाल की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है, और ममता बनर्जी की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का सीधा असर इसी बड़े वोट बैंक पर पड़ता है। अब देखना यह है कि दो चरणों का यह नया प्रयोग बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में सौंपता है।
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