Wild News
Wild News: बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्थानीय निवासियों के रोंगटे खड़े कर दिए। वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) की हाई-प्रोफाइल ऑफिसर कॉलोनी में दो विशालकाय सांपों के बीच वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिली। रिहायशी इलाके में अचानक 14 फीट लंबा किंग कोबरा और एक रैट स्नेक (धामन सांप) आमने-सामने आ गए। प्रकृति के इस खतरनाक द्वंद्व को देखकर कॉलोनी में हड़कंप मच गया। आमतौर पर जंगलों के भीतर होने वाली यह भिड़ंत इस बार इंसानी बस्ती के बीचों-बीच हो रही थी।
इस घटना का खुलासा तब हुआ जब एक अधिकारी के आवास के बाहर पालतू और आवारा कुत्तों ने एक साथ मिलकर जोर-जोर से भौंकना शुरू कर दिया। कॉलोनी के लोग कुत्तों के इस असामान्य व्यवहार को सुनकर जब अपने घरों से बाहर निकले, तो सामने का नजारा देख उनकी चीख निकल गई। कैंपस के गार्डन एरिया में दो बड़े सांप फन उठाए एक-दूसरे पर हमला करने की मुद्रा में थे। कुत्तों के लगातार शोर मचाने के कारण पूरी कॉलोनी के लोग वहां एकत्र हो गए, लेकिन सांपों का आकार और उनका गुस्सा देखकर कोई भी उनके करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
देखते ही देखते 14 फीट लंबे विशालकाय किंग कोबरा ने रैट स्नेक पर हमला बोल दिया और उसे अपनी कुंडली में जकड़ लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह संघर्ष कुछ ही देर चला, जिसके बाद ‘नागराज’ ने रैट स्नेक को सिर की तरफ से जिंदा निगलना शुरू कर दिया। यह दृश्य जितना दुर्लभ था, उतना ही डरावना भी। लोग दूर खड़े होकर इस घटना का वीडियो बनाने लगे। किंग कोबरा की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपने से काफी बड़े दिखने वाले रैट स्नेक को कुछ ही मिनटों में पूरी तरह निगल लिया।
कॉलोनी में बढ़ते खतरे को देखते हुए तुरंत वन विभाग को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही वीटीआर के वन कर्मी और प्रसिद्ध स्नेक एक्सपर्ट शंकर यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। उस समय तक किंग कोबरा अपना शिकार निगल चुका था और सुस्ती के कारण वहीं पास की झाड़ियों में छिपा हुआ था। शंकर यादव ने बड़ी ही सावधानी और पेशेवर दक्षता के साथ 14 फीट लंबे इस जहरीले सांप को रेस्क्यू किया। पकड़े जाने के दौरान किंग कोबरा ने काफी प्रतिरोध किया, लेकिन अंततः उसे सुरक्षित रूप से पकड़कर बोरे में बंद कर लिया गया।
सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम किंग कोबरा को लेकर वीटीआर के जटाशंकर स्थित घने जंगलों में पहुँची, जहाँ उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। वन अधिकारियों ने बताया कि किंग कोबरा का मुख्य भोजन अन्य सांप ही होते हैं, इसलिए इसे ‘सांपों का राजा’ कहा जाता है। हालांकि, रिहायशी इलाके में इस तरह शिकार करना असामान्य है। विभाग ने ऑफिसर कॉलोनी और आसपास के निवासियों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और घरों के आसपास सफाई रखें। साथ ही, किसी भी वन्यजीव के दिखने पर खुद उसे पकड़ने के बजाय तुरंत विशेषज्ञों को सूचित करें।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जंगलों के करीब बनी कॉलोनियों में वन्यजीवों का आना स्वाभाविक है। किंग कोबरा जैसे दुर्लभ और लुप्तप्राय जीवों का संरक्षण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी आम लोगों की सुरक्षा भी है। वाल्मीकिनगर की इस घटना ने न केवल लोगों को रोमांचित किया, बल्कि वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और सावधानी बरतने का संदेश भी दिया है। स्थानीय प्रशासन अब इस क्षेत्र में गश्त बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
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