Comet 2026 Update
Comet 2026 Update: ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो सदियों में केवल एक बार घटती हैं। वर्तमान में खगोलशास्त्री और अंतरिक्ष प्रेमी एक ऐसी ही दुर्लभ घटना के गवाह बनने जा रहे हैं। एक अत्यंत दुर्लभ ‘इंटरस्टेलर’ यानी अंतरतारकीय धूमकेतु हमारे सौर मंडल के करीब से गुजर रहा है। यह खगोलीय मेहमान न केवल वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है, बल्कि आम लोगों के लिए भी यह जीवन में एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर है। इस धूमकेतु का नाम C/2025 R3 (Pan-STARRS) रखा गया है, जो अपनी चमक से रात के आकाश को रोशन करने के लिए तैयार है।
इस खास धूमकेतु को पहली बार 7 सितंबर 2025 को हवाई के हलीकाला (Haleakala) में स्थित ‘Pan-STARRS’ वेधशाला द्वारा खोजा गया था। वैज्ञानिकों ने जब इसकी कक्षा और गति का अध्ययन किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह धूमकेतु सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 1,70,000 साल का समय लेता है। इसका अर्थ यह है कि पिछली बार जब यह पृथ्वी के करीब से गुजरा था, तब इंसान पाषाण युग या प्रागैतिहासिक काल में जी रहा था। इतनी लंबी अवधि के बाद इसका पुनरागमन इसे ‘शताब्दी की सबसे बड़ी खगोलीय घटनाओं’ में से एक बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस धूमकेतु को निहारने के लिए 10 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच का समय सबसे उपयुक्त है। इन तारीखों के दौरान इसकी चमक लगातार बढ़ती जाएगी। मुख्य खगोलीय घटनाओं का कैलेंडर कुछ इस प्रकार है:
19 अप्रैल: इस दिन धूमकेतु सूर्य के सबसे निकटतम बिंदु यानी ‘पेरिहेलियन’ (Perihelion) पर होगा। सूर्य की गर्मी के कारण इस समय इसकी पूंछ सबसे अधिक स्पष्ट हो सकती है।
27 अप्रैल: यह पृथ्वी के सबसे करीब होगा और अपनी अधिकतम चमक पर होगा। हालांकि, 27 अप्रैल के बाद यह उत्तरी गोलार्ध के दर्शकों के लिए ओझल होना शुरू हो जाएगा।
प्रसिद्ध खगोलविद् निक जेम्स के अनुसार, इस धूमकेतु को देखने के लिए आपको अपनी नींद का थोड़ा त्याग करना होगा। इसे देखने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय से लगभग 1 से 2 घंटे पहले का है। दर्शकों को पूर्व दिशा के साफ आसमान की ओर देखना चाहिए। वर्तमान में यह धूमकेतु ‘पेगासस’ (Pegasus) तारामंडल में स्थित है और ‘ग्रेट स्क्वायर ऑफ पेगासस’ के पास से अपनी यात्रा कर रहा है। जैसे-जैसे दिन बीतेंगे, यह आकाश में अपनी स्थिति बदलता रहेगा।
धूमकेतु किसी सामान्य तारे की तरह स्थिर बिंदु नहीं होता। इसे पहचानने के लिए इसके ‘कोमा’ (Coma) यानी केंद्र के चारों ओर मौजूद धुंधली चमक पर ध्यान दें। सूर्य के नजदीक पहुंचने पर इसके पीछे एक लंबी और सुंदर पूंछ दिखाई देने लगेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसे अंधेरे स्थानों से नंगी आंखों से देखा जा सकेगा, लेकिन बेहतर अनुभव के लिए 10×50 बाइनोक्युलर या एक छोटे टेलीस्कोप का उपयोग करना बुद्धिमानी होगी।
अगर आप इस दुर्लभ नजारे का आनंद लेना चाहते हैं, तो शहर की चकाचौंध और कृत्रिम रोशनी से दूर किसी शांत और अंधेरे इलाके में जाएं। ऊंचे भवनों या पेड़ों से मुक्त खुला मैदान इसके अवलोकन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। याद रखें, यह मौका अब दोबारा 1.7 लाख साल बाद ही आएगा, इसलिए इस खगोलीय जादू को अपनी आंखों में कैद करना न भूलें।
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