तालिबान-पाकिस्तान में क्या होकर रहेगी War?
Pak-Afghanistan Crisis: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब और गंभीर हो गया है। दोनों देशों के बीच हालिया झड़पों में सैनिकों के मारे जाने के बाद इस्तांबुल में हुई तीसरे दौर की शांति वार्ता भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और अविश्वास और गहरा गया है।
अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात ने पाकिस्तान पर वार्ता को विफल करने का आरोप लगाया। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान ने वार्ता के दौरान “गैर-जिम्मेदाराना” रवैया अपनाया और सहयोग से बचने की कोशिश की।
मुजाहिद ने कहा, “अफगान प्रतिनिधिमंडल पूरी गंभीरता से बातचीत में शामिल हुआ था, लेकिन पाकिस्तान ने एक बार फिर सभी जिम्मेदारियों को हमारे सिर मढ़ने की कोशिश की।”उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की ओर से सीमा विवाद सुलझाने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस प्रस्ताव दिए गए, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं हुई।
तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह न तो अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है और न ही अफगानिस्तान की चिंताओं को गंभीरता से लेता है।अफगान प्रतिनिधियों के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद और गोलीबारी के मामलों को अफगान पक्ष पर थोपता रहा है।तालिबान ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान की जमीन किसी भी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं की जाएगी और देश की संप्रभुता और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।
अफगानिस्तान के मंत्री नोरोल्लाह नूरी ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अफगान जनता को कमजोर न समझा जाए। उन्होंने कहा, “अगर युद्ध हुआ, तो अफगानिस्तान के बूढ़े-जवान सभी एक साथ खड़े होंगे। सिर्फ तकनीकी हथियारों पर भरोसा करने की गलती पाकिस्तान को भारी पड़ सकती है।”नूरी ने कहा कि तालिबान केवल अपनी “जिम्मेदारियों और क्षमताओं” के अनुरूप ही सहयोग करेगा और किसी भी देश के दबाव में नहीं झुकेगा।
इस्तांबुल में हुई बैठक में तुर्की और कतर ने दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रखने की कोशिश की, लेकिन सीमा हिंसा, आतंकवाद के आरोपों और आर्थिक मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।कतर के एक अधिकारी के मुताबिक, वार्ता “तनावपूर्ण माहौल” में समाप्त हुई और निकट भविष्य में किसी समाधान की संभावना कम दिख रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ती हिंसा से न केवल दोनों देशों की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। सीमा पार से लगातार हो रही फायरिंग और चरमपंथी गतिविधियों ने दोनों देशों के रिश्तों को दशकों पीछे धकेल दिया है।फिलहाल, इस्तांबुल वार्ता के नतीजे न आने के बाद यह विवाद एक बार फिर खुले संघर्ष की कगार पर पहुंच गया है, और दोनों देशों की बयानबाजी से हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं।
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