Hilsa Fish Gift: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में हालिया राजनीतिक घटनाओं के कारण कुछ खटास आई है। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद छोड़ने और भारत आ जाने से द्विपक्षीय रिश्तों में जरा सा ठहराव आया है। इसके बावजूद इस बार बांग्लादेश ने भारत को त्योहारों के मौके पर 8 ट्रक, लगभग 32 टन हिल्सा मछली भेजी है। यह कदम क्या दोनों देशों की दोस्ती को फिर से मजबूत कर पाएगा? आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
हिल्सा मछली बंगाल क्षेत्र में खास महत्व रखती है। दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों में इसे पवित्र माना जाता है और इसे खाने की परंपरा भी है। बांग्लादेश के पद्मा नदी की हिल्सा मछली अपनी स्वादिष्टता के लिए जानी जाती है, जो पश्चिम बंगाल की हुगली नदी की हिल्सा से भी बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि भारत में बंगाल, असम और त्रिपुरा में इसकी मांग काफी अधिक है।
हाल ही में बांग्लादेश ने भारत को 1,200 टन हिल्सा मछली निर्यात करने की मंजूरी दी थी, जो 16 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच सप्लाई की जाएगी। हर ट्रक में लगभग 4 टन मछली भरी होती है। कोलकाता के थोक बाजारों में इसकी कीमत लगभग 1,800 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है।
इस साल हिल्सा की सप्लाई 2019 के बाद सबसे कम देखी गई है। उस वर्ष बांग्लादेश ने 500 मीट्रिक टन निर्यात की अनुमति दी थी। इसके बाद 2020 में 1850 टन, 2021 में 4600 टन, 2022 में 2900 टन और 2023 में 3950 टन मछली निर्यात हुई। लेकिन इस बार राजनीतिक उथल-पुथल और तनाव के कारण निर्यात संख्या घटकर लगभग 2420 टन रह गई है।
इसके अलावा, व्यापार के लिए दिया गया समय भी कम है, इसलिए 1200 टन में से पूरा माल पश्चिम बंगाल तक पहुंचना संभव नहीं होगा। 2024 में बांग्लादेश से केवल 577 टन मछली पश्चिम बंगाल पहुंच पाई थी।
इस साल बांग्लादेश से मछली के कम इंपोर्ट के कारण व्यापारियों ने गुजरात से बड़ी मात्रा में हिल्सा मंगवाई है। पिछले वर्षों में 500-700 टन हिल्सा गुजरात से आती थी, लेकिन इस बार यह संख्या 4000 टन से अधिक हो गई है। मानसूनी बारिश के कारण हिल्सा उत्पादन में भी वृद्धि हुई है, जो मछली बाजार के लिए अच्छी खबर है।
हालांकि हिल्सा मछली का त्योहारों के दौरान निर्यात एक सकारात्मक पहल है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए इसे दोस्ती का एक बड़ा संकेत नहीं माना जा सकता। यह कदम सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने की कोशिश जरूर है, लेकिन राजनीतिक मुद्दों के समाधान के बिना दीर्घकालिक दोस्ती स्थापित करना मुश्किल होगा।
फिर भी, हिल्सा मछली की सप्लाई से एक संदेश जरूर जाता है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते पूरी तरह टूटे नहीं हैं। समय के साथ सही कूटनीति और संवाद से इन रिश्तों को बेहतर किया जा सकता है।
हिल्सा मछली का निर्यात भारत-बांग्लादेश के बीच एक छोटे से सेतु के रूप में काम कर सकता है, लेकिन यह दोनों देशों की दोस्ती का पूरा पैमाना नहीं हो सकता। इसके लिए राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर स्थिरता जरूरी है।
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