Rahul Gandhi vs EC :कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा कर्नाटक में वोटर लिस्ट में धांधली के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल गांधी को पत्र लिखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनके आरोप गलत साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चुनाव आयोग ने मांगा शपथ पत्र
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी से मांग की है कि वे अपने आरोपों के समर्थन में एक हलफनामा (शपथ पत्र) पेश करें। इस दस्तावेज़ में उन्हें उन अपात्र मतदाताओं के नाम, पार्ट नंबर और सीरियल नंबर का स्पष्ट विवरण देना होगा जिन्हें वोटर लिस्ट में जोड़ा गया है, और उन पात्र मतदाताओं के विवरण भी देने होंगे जिनके नाम कथित रूप से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी चेताया है कि अगर इस हलफनामे में दी गई जानकारी असत्य या भ्रामक पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

1 से 3 बजे तक मिलने का समय
सीईओ कार्यालय ने बताया कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने 8 अगस्त को ज्ञापन सौंपने और बातचीत के लिए समय मांगा था। इसके लिए उन्हें शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का समय दिया गया है। आयोग के अनुसार, यह मुलाकात मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर ठोस चर्चा के लिए है।
आयोग ने राहुल के आरोपों को बताया भ्रामक
चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूची जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत पूरी पारदर्शिता से तैयार की गई है। आयोग के अनुसार, नवंबर 2024 में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और जनवरी 2025 में अंतिम मतदाता सूची कांग्रेस को भेजी गई थी। उस समय कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक आपत्ति या अपील दाखिल नहीं की गई। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले बयानों को “भ्रामक, तथ्यहीन और धमकाने वाला” बताया है।
परिणामों को चुनौती देने की संवैधानिक प्रक्रिया
सीईओ कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव परिणामों से संबंधित आपत्तियों को केवल उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। सीधे आरोप लगाकर चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न केवल संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि जनता के बीच भ्रम फैलाने जैसा है।
राहुल गांधी के आरोपों से उत्पन्न यह विवाद अब केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह कानूनी दिशा भी ले सकता है। चुनाव आयोग द्वारा हलफनामा मांगे जाने के बाद अब यह राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निर्भर करता है कि वे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करें या फिर संभावित कानूनी कार्रवाई का सामना करें।
रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क
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