एक ऐसा रहस्य जो भारतीय राजनीति और योग परंपरा को जोड़ता है, कैसे एक योग गुरु ने सत्ता के गलियारों तक अपनी गहरी पैठ बनाई, क्यों इंदिरा गांधी उनसे योग सीखती थीं और क्या सच में पंडित नेहरू शीर्षासन करते थे, इस इतिहास की परतें आज भी अनसुलझी हैं?
एक ऐसा रहस्य जो भारतीय राजनीति और योग परंपरा को जोड़ता है, कैसे एक योग गुरु ने सत्ता के गलियारों तक अपनी गहरी पैठ बनाई, क्यों इंदिरा गांधी उनसे योग सीखती थीं और क्या सच में पंडित नेहरू शीर्षासन करते थे, इस इतिहास की परतें आज भी अनसुलझी हैं?

Political Yoga History : आज जब पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है और योग करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, तो इस बदलाव के पीछे के मुख्य नायकों को याद करना प्रासंगिक हो जाता है। भारत में योग को आधुनिक और लोकप्रिय रूप देने का श्रेय निस्संदेह महान योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी को जाता है। 1958 में बिहार के मधुबनी में जन्मे धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने योग को केवल संन्यासियों के आश्रमों तक सीमित न रखकर इसे जन-जन तक पहुँचाया। 1970 और 80 के दशक में, जब योग का इतना व्यापक प्रसार नहीं था, तब उन्होंने दूरदर्शन के माध्यम से योग को भारत के हर घर की दहलीज तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया।

धीरेंद्र ब्रह्मचारी की लोकप्रियता उस समय चरम पर थी, जब वे दिल्ली की फ्रेंड्स कॉलोनी में अपने निवास को योग का एक प्रमुख केंद्र बनाए हुए थे। उनकी प्रभावशाली व्यक्तित्व, लंबी कद-काठी और आंखों का तेज लोगों को सहज ही आकर्षित करता था। देश के बड़े उद्योगपति, नेता और प्रभावशाली हस्तियाँ उनसे योग सीखने के लिए घंटों प्रतीक्षा किया करते थे। उन्हें भारत का पहला ‘सेलिब्रिटी योग गुरु’ माना जा सकता है। 1978 से 1983 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित उनके योग कार्यक्रम ने योग के प्रति लोगों की धारणाओं को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने यह साबित किया कि योग केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि युवाओं के लिए भी स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहने का सबसे सशक्त माध्यम है।

धीरेंद्र ब्रह्मचारी का नाम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योग गुरु के रूप में इतिहास में दर्ज है। उनका प्रभाव इतना गहरा था कि वे प्रतिदिन इंदिरा गांधी के सफदरजंग रोड स्थित आवास पर जाकर उन्हें योग शिक्षा देते थे, यहाँ तक कि कड़ाके की ठंड में भी यह क्रम नहीं टूटता था। रोचक तथ्य यह है कि जब वे इंदिरा गांधी को योग सिखाते थे, तब देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनसे योग की बारीकियां समझते थे और स्वयं शीर्षासन का अभ्यास करते थे। उनके मार्गदर्शन में आर.के. धवन, बूटा सिंह और यशपाल कपूर जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने भी योग की दीक्षा ली थी।
योग को शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने में भी धीरेंद्र ब्रह्मचारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने केंद्रीय विद्यालयों में योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अथक प्रयास किए, जिससे न केवल योग को एक विषय के रूप में पहचान मिली, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि आने वाली पीढ़ियां शुरुआती शिक्षा के साथ ही योग के महत्व को समझें। अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक, वे योग को आधिकारिक रूप से एक खेल का दर्जा दिलाने के लिए प्रयासरत रहे, ताकि इसे और अधिक व्यापक स्वीकृति मिल सके।
9 जून 1994 को एक विमान दुर्घटना में इस महान योग गुरु का आकस्मिक निधन हो गया। जम्मू-कश्मीर के मंतलाई स्थित अपने आश्रम जाते समय विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें उन्होंने अपनी जान गँवा दी। आज, जब हम योग की वैश्विक लोकप्रियता देखते हैं, तो धीरेंद्र ब्रह्मचारी का योगदान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। योग को एक विज्ञान और जीवनशैली बनाने के उनके सपने को आज करोड़ों लोग जी रहे हैं। उनकी स्मृतियां और उनके द्वारा दी गई शिक्षाएं सदैव भारतीय योग परंपरा के स्वर्णिम अध्याय के रूप में जीवित रहेंगी।

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