UP Muharram Guidelines : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने आगामी मोहर्रम को लेकर राज्यभर में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि मोहर्रम मातम का अवसर है, न कि किसी प्रकार के शक्ति प्रदर्शन का। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि शांति व्यवस्था भंग करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हथियार प्रदर्शन और डीजे पर पूर्ण नियंत्रण के आदेश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मोहर्रम के दौरान किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कानफोड़ू डीजे, ढोल और ताशों के अनियंत्रित प्रयोग पर भी सख्त रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नई परंपरा की शुरुआत को अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

ताजियों की ऊंचाई और जुलूस व्यवस्था पर विशेष नियम
सीएम योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि मोहर्रम के दौरान ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुसार ही रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि 10 से 12 फीट से अधिक ऊंचे ताजियों की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य जुलूस के दौरान संभावित दुर्घटनाओं से बचाव और भीड़ नियंत्रण को सुनिश्चित करना है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी आयोजन सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संपन्न हों।
जिलों में पहले से संवाद और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की कानून-व्यवस्था और आगामी त्योहारों की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि वे मोहर्रम से पहले स्थानीय स्तर पर समुदाय के लोगों के साथ संवाद स्थापित करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी जिले में कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई अप्रिय घटना न हो।
प्रशासनिक अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें और किसी भी स्थिति में लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मोहर्रम का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह महीना पैगंबर हजरत मुहम्मद और इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे गम का महीना भी कहा जाता है। इस दौरान विशेष रूप से शिया समुदाय शोक मनाता है और धार्मिक परंपराओं का पालन करता है। मोहर्रम के पहले दिन से ही इस्लामिक नववर्ष यानी हिजरी संवत की शुरुआत भी होती है। यह महीना इस्लाम के चार पवित्र महीनों में से एक माना जाता है, जिसमें शांति और संयम का विशेष महत्व होता है।











