Narayanpur Naxals Surrender: नारायणपुर में 12 इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, बड़ी सफलता

Narayanpur Naxals Surrender:  छत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को 12 सक्रिय नक्सलियों ने सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में दो एरिया कमेटी मेंबर सहित LOS-CNM, PPCM, मिलिट्री प्लाटून और जनताना सरकार के पदाधिकारी शामिल हैं। इन सभी पर कुल मिलाकर 18 लाख रुपए से अधिक का इनाम घोषित था।

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आत्मसमर्पण का आयोजन और शामिल अधिकारी

आत्मसमर्पण का यह कार्यक्रम नारायणपुर पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुड़िया की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि इन नक्सलियों ने पूछताछ में यह स्वीकार किया है कि “शीर्ष माओवादी नेता ही असली शोषक हैं, जो आदिवासी समुदाय को जल-जंगल-जमीन और न्याय के नाम पर गुलाम बनाते हैं।”

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आत्मसमर्पण के पीछे बदली सोच और सुरक्षाबलों का दबाव

पुलिस अधीक्षक गुड़िया ने कहा कि यह आत्मसमर्पण सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और आदिवासी समाज की बदलती सोच का परिणाम है। उन्होंने बताया कि सभी 12 नक्सलियों को सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है और उन्हें पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

नक्सलवाद पर सरकार की सख्त रणनीति

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद को मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।साल 2024 में 928 नक्सलियों ने सरेंडर किया था।2025 में अब तक (सितंबर तक) 718 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।वहीं, 2025 में अब तक 241 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं।इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार की तीव्र और ठोस रणनीति जमीन पर असर दिखा रही है।

सरकार की पुनर्वास नीति बनी अहम कारक

सरकार द्वारा चलाई जा रही पुनर्वास नीति ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण में अहम भूमिका निभाई है। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे मनोवैज्ञानिक अभियान और विश्वास बहाली की प्रक्रिया ने भी नक्सलियों को मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।

नारायणपुर में 12 नक्सलियों का आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता है, बल्कि यह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की स्वीकारोक्ति यह बताती है कि अब आदिवासी समुदाय भी माओवाद के झूठे वादों से बाहर निकल रहा है और विकास व शांति की राह पर बढ़ रहा है।

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